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केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने श्रमिक संगठनों से अपील कर कहा- राष्ट्र हित में न जाएं हड़ताल पर, ‘आपकी’ आशंकाएं हैं निराधार

कोरबा (गेंदलाल शुक्ल) । केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कोल इंडिया के श्रमिक संगठनों से अपील की है कि वे राष्ट्र हित में 2 से 4 जुलाई तक प्रस्तावित अपनी हड़ताल वापस ले लें। बुधवार को कोल इंडिया के 4 केंद्रीय श्रमिक संगठनों बीएमएस, एचएमएस, एटक और सीटू के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये आहूत बैठक में उन्होंने यह अपील की। उन्होंने कहा कि कमर्शियल माइनिंग के मामले में श्रमिक संगठनों की आशंकाएं निराधार हैं। साथ ही, उन्होंने भारत को कोयले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सशक्त करने की अपील की।

उन्होंने कोल इंडिया परिवार को आश्वस्त किया कि कमर्शियल माइनिंग से कोल इंडिया का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। कोल इंडिया भारत में कोयला उत्पादन की सबसे बड़ी कंपनी थी, है और रहेगी। हड़ताल से कोयला कामगारों का, कंपनी का और सबसे ऊपर भारत का भारी नुकसान होगा।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के लिए राष्ट्र को बिजली चाहिए, जो पर्याप्त कोयले के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया पर भारत को गर्व है, जो भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी है और अकेले भारत का 80% से अधिक कोयला निकाल रही है। फिर भी भारत को सालाना लगभग 250 मिलियन कोयले का आयात करना पड़ता है। अपने भारत में पर्याप्त कोयला रहते हुए कोयले का आयात किसी पाप से कम नहीं है।

कोयले की इसी मांग एवं आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए हाल ही में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में कोयले की कमर्शियल माइनिंग के लिए ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि हमारा पड़ोसी देश चीन सालाना 3,500 मिलियन टन कोयला निकालकर अपने विकास को नई रफ्तार दे रहा है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कोयला रिजर्व रखकर भी चीन आज सबसे बड़ा कोयला उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। विकास की दौड़ में चीन को टक्कर देते हुए उससे आगे निकलने के लिए भी यह बेहद जरूरी है कि हम अपने भारत में मौजूद विशाल कोयला भंडार का जल्द से जल्द दोहन करें।

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