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रामजानकी मंदिर परिसर में हवन-पूर्णाहुति एवं विशाल भण्डारा के साथ संपन्न हुआ श्रीनारायण महायज्ञ

पेण्ड्रा (आशुतोष दुबे)। सोनभद्र समीपस्थ सिद्ध बाबा पहाड़ी सकोला कोटमीकला में स्थित श्रीरामजानकी मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण एवं नारायण महायज्ञ का समापन हवन पूर्णाहुति व विशाल भण्डारा के साथ संपन्न हुआ।

रामजानकी मंदिर के आचार्य गुरुचरणदास महाराज के सान्निध्य व मार्गदर्शन में इस प्रकार धार्मिक आयोजन विगत कई वर्षों से चला आ रहा है। मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष यज्ञ व कथाएं क्षेत्रवासियों को देखने-सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस धार्मिक स्थल में दूर-दूर से दर्शनार्थी एवं भक्तजन पहुँचकर पुण्यार्जन करते हुए अपने जीवन को सफल बना रहे हैं।

‘सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ की कामना से परिपूर्ण लोक कल्याणार्थ भागवत महापुराण नारायण महायज्ञ बसंत पंचमी से प्रारंभ होकर माघी पूर्णिमा को वैदिक मंत्रोच्चारण पूर्णाहुति के साथ कार्याक्रम संपन्न हुआ। यज्ञाचार्य विद्याभूषण तिवारी तथा प्रमुख यजमान रामावतार उर्मलिया द्वारा श्रद्धा-भक्ति के साथ पूजन-अनुष्ठान को वैदिक विधि-विधान के साथ कराया गया।

श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम् व सप्तम दिवस में व्यासपीठ में विराजमान कथाव्यास अवधेशप्रताप शास्त्री ने गिरिराज गोवर्धन महाराज के महिमा का विस्तार से वर्णन करते हुये बताया कि ब्रज में इनकी बड़ी महिमा है। इनकी परिक्रमा करने एवं श्रद्धा भक्ति से पूजन करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। बालकृष्ण ने ब्रजवासियों को इन्द्र के कोप से बचाने के लिए अपनी कनिष्ठ ऊँगली से सात कोस के विशाल पर्वत को उठा लिया। इसका अर्थ है कि भगवान अपने भक्तों की हर क्षण रक्षा करने को तत्पर रहते हैं। जीवन में व्यक्ति को ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे सम्पूर्ण मानव समाज गौरवान्वित हो।

आशा निराशा के वशीभूत ना होकर व्यक्ति को परोपकार की भावना परिपूर्ण होकर धर्म की रक्षा करते हुए सद्मार्ग पर चलना चाहिए। ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ धर्म का पालन करने हेतु व्यक्ति को शास्त्र वेद पुराण का गहन अध्ययन करना चाहिए संत महात्माओं के बताये गये सद्मार्ग का अनुशरण कर गुरु की विशेष कृपा को मानना चाहिए जिससे संपूर्ण मानव समाज में धर्म शिक्षा का व्यापक स्तर पर प्रभाव परिलक्षित हो।शिक्षा संस्कार में हमारी आने वाली पीढ़ी अग्रगणी हो।

इस कार्य में प्रतिदिन क्षेत्र के भक्तों द्वारा सार्वजनिक रूप से भंडारा प्रसाद में सहयोग प्रदान किया जा रहा है तथा भण्डारा प्रसाद में सुल्तानिया परिवार का विशेष सहयोग प्रतिवर्ष मिलता है यह ईश्वरीय कृपा है आगे की कथा में भागवत के अनेक प्रसङ्ग महारास लीला का वर्णन,भगवान का मथुरा गमन,कंस वध, उद्धव चरित्र, कृष्ण रुक्मणी मङ्गल विवाह, सुदामा चरित्र का वर्णन कर व्यास ने सभी भक्तों को भाव विभोर कर दिया।

इस धार्मिक कार्य को व्यवस्थित एवं सफल रूप देने में मंदिर के पंडित संदीप मिश्रा, नत्थूराम तिवारी, संजय मिश्रा, बलराम तिवारी, सतीश शर्मा, पूरनलाल शर्मा, हरवंश पाण्डेय, चन्द्रकान्त शर्मा, ओमप्रकाश पाण्डेय, रतन केशरवानी, राजू गुप्ता , कृष्ण कुमार साहू सहित क्षेत्र के अनेकों भक्तजन समर्पण भाव से सहयोग प्रदान किये।

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