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ग्वारीघाट जहां गुरुनानक देव ने तपस्या की थी यहां मां नर्मदा भी शांत स्वरूप में बह रही हैं …

नर्मदा परिक्रमा भाग – 31

अक्षय नामदेव । हम भेड़ाघाट का दर्शन कर जब ग्वारीघाट के लिए जा रहे थे तब पुलिस आने जाने वाले लोगों को मास्क को लेकर समझाइश दे रही थी तथा मास्क नहीं पहने लोगों से जुर्माना भी वसूल रही थी परंतु पुलिस ज्यादातर बाहरी लोगों को ही निशाना बना रही थी तथा जुर्माना वसूल रही थी। कोरोनावायरस संक्रमण से बचाव को लेकर जबलपुर का पुलिस प्रशासन कुछ ज्यादा ही सक्रिय दिख रहा था । 31 मार्च 2021 को जब हम ग्वारीघाट पहुंचे तो वहां भी पुलिस सक्रिय दिखी।

मौसम या महीना कोई भी हो ग्वारीघाट नर्मदा तट पर मेले जैसा ही माहौल रहता है। उस दिन  भी वैसा था। दोपहर के 2:30 बजे भी लोग नर्मदा तट पर स्नान दर्शन पूजन कर रहे थे। पुलिस के सायरन वाली गाड़ियों की आवाजाही नर्मदा तट पर हो रही थी तथा वहां तट पर स्थित होटल संचालकों को पुलिस के द्वारा समझाइश दी जा रही थी।

हम नर्मदा तट ग्वारीघाट पर पहुंच कर मां नर्मदा की पूजा अर्चना की। जलसिंचन किया तथा मां नर्मदा का ध्यान करते हुए काफी देर तक तट पर बैठे रहे। ग्वारीघाट में नर्मदा अत्यंत शांत स्वरूप में बहती है। नर्मदा के बीच धार में यहां मां नर्मदा की सुंदर मूर्ति स्थापित की गई है जो गौरी स्वरूप में है। ग्वारीघाट में लोग नौका विहार भी कर रहे थे । नर्मदा तट पर बड़ी संख्या में सजी-धजी नाव है जो नौका विहार करने वाले यात्रियों की प्रतीक्षा करती मिली। हम नर्मदा उत्तर तट पर बैठकर हम दक्षिण तट स्थित गुरुद्वारा को देख पा रहे थे। यह गुरुद्वारा काफी पुराना है जिसे सिख धर्म के अनुयायियों ने आधुनिक रूप दे दिया है। बताते हैं कि सिख धर्म के गुरु नानक यहां नर्मदा के दक्षिण तट में काफी दिनों तक तपस्या की है जहां यह गुरुद्वारा बनाया गया। नर्मदा तट जबलपुर का ग्वारीघाट का पौराणिक रूप से महत्वपूर्ण है। गरुड़ पुराण के अनुसार यहां अंतिम संस्कार करना पुण्य दाई तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। ग्वारीघाट में अनेक मंदिरों के समूह हैं जिसमें से प्रमुख गुप्तेश्वर नाथ मंदिर है यहां चंडिका एवं काल भैरव का भी मंदिर स्थित है जो काफी पुराना है।

जबलपुर क्षेत्र में नर्मदा तट पर सिर्फ लम्हेटा घाट, भेड़ाघाट एवं ग्वारीघाट भर नहीं है। इनके अलावा यहां दर्जनभर घाट है जिन की महत्ता प्राचीन काल से बनी हुई है जहां धार्मिक अनुष्ठान पर्व एवं उत्सव स्नान एवं दान की परंपरा निरंतर चलती आ रही है

इन तटों पर अनेक मंदिर एवं देवालय स्थित हैं। जबलपुर नर्मदा तट के प्रमुख घाटों में नंदिकेश्वर घाट, नांदिया घाट, खिरनी घाट, तिलवारा घाट, त्रिशूल घाट, गोपालपुर घाट, रामघाट, सिद्धा घाट, जिलहरी घाट, मालकचछ घाट, बेल पठार घाट स्थित है जहां आप कुछ दिन रह कर इन घाटों का दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं।

नर्मदा तट ग्वारीघाट पर पूजा पाठ करा रहे पंडित जी ने बताया कि नर्मदा तट स्थित जबलपुर में लगभग 52 प्राचीन तालाब है जो यहां के शासकों की जल संचय नीति का परिचय देते हैं। इन तालाबों में प्रमुख आधार ताल ,रानीताल, चेरीताल, हनुमान ताल ,फूटा ताल, मढ़ाताल, हाथी ताल ,सुपा ताल ,देवताल ,कोलाताल, बघाताल ,ठाकुर ताल ,गुलौआं ताल ,माढ़ोताल, मठाताल सूआताल ,खंब ताल गोकलपुर ताल, शाही ताल, महानददा ताल, उखरी ताल, कदम तलैया ,भान तलैया, श्रीनाथ की तलैया, तिलक  भूमि की तलैया, बैनी सिंह की तलैया, लोको तलैया, तीन तलैया, ककरैया तलैया ,जूडी तलैया, गंगासागर, संग्राम सागर इत्यादि है जो यहां उत्तम जल प्रबंधन का परिचय देते हैं। हालांकि इन तालाबों में से बहुत सारे तालाब अस्तित्व खो चुके हैं परंतु इन तालाबों के नाम से ही जबलपुर के विभिन्न मोहल्ले का नामकरण है।

अन्य दर्शनीय स्थान में गोंडवाना शासक द्वारा 1100 में बनाया गया मदन महल है भेड़ाघाट स्थित 64 योगिनी एवं धुआंधार जलप्रपात की चर्चा किए बगैर जबलपुर दर्शन अधूरा है। देवस्थान में त्रिपुर सुंदरी उल्लेखनीय है।

हम यहां नर्मदा तट ग्वारीघाट में पंडित जी से चर्चा में मग्न थे उधर तिवारी जी नर्मदा तट पर स्थित एक होटल में भोजन की व्यवस्था करके आ गए थे। उन्होंने हमें सूचना दी कि यहां अच्छा भोजन मिल जाएगा। पंडित जी से विदा लेकर हम सब ने दाल बाटी एवं आलू भटे का भर्ता तथा चावल दाल एवं मट्ठा खाया तथा आगे की परिक्रमा में रवाना हो गए।

हर हर नर्मदे                                                                           क्रमश:

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