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छठ पर्व : आज शाम को दिया जाएगा डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य…

नई दिल्ली। आज शाम डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं 11 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ पर्व संपन्न होगा। छठ महापर्व की शुरूआत 8 नवंबर को नहाए-खाए के साथ हुई थी। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पर्व मनाया जाता है।

छठ पर्व मुख्य तौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। छठ पर्व में 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं को अनुसार, छठ व्रत खास तौर पर संतान प्राप्ति और उसकी खुशहाली के लिए रखा जाता है। जो लोग संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए यह व्रत लाभकारी साबित होता है। मान्यता है कि छठ पूजा करने से छठी मइया की कृपा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

बिहार में बुधवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य का समय शाम 4:30 से 5:26 बजे तक है। गुरुवार सुबह उदयगामी सूर्य को अर्घ्य का समय 6:34 बजे है।

प्रसाद रखने के लिए बांस की दो तीन बड़ी टोकरी,  बांस या पीतल के बने तीन सूप, लोटा, थाली, दूध और जल के लिए ग्लास, नए वस्त्र साड़ी-कुर्ता पजामा, चावल, लाल सिंदूर, धूप और बड़ा दीपक, पानी वाला नारियल, गन्ना जिसमें पत्ता लगा हो, सुथनी और शकरकंदी, हल्दी और अदरक का पौधा हरा हो तो अच्छा, नाशपाती और बड़ा वाला मीठा नींबू, जिसे टाब भी कहते हैं, शहद की डिब्बी, पान और साबुत सुपारी, कैराव, कपूर, कुमकुम, चन्दन, मिठाई।

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