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बड़ी खबर : अरब देशों में पहली बार कोई महिला बनी प्रधानमंत्री, जल्द संभालेंगी ट्यूनीशिया का कामकाज …

नई दिल्ली। ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को अपदस्थ करने और संसद भंग होने के दो महीने बाद एक महिला को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। नाजला बूदेन रमधाने अब ट्यूनीशिया की पहली महिला प्रधानमंत्री होंगी। ट्यूनीशिया के राष्ट्रपति कैस सईद ने निर्वाचित सरकार को हटाने और सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लगभग दो महीने बाद नाजला बूदेन रमधाने नाम की एक महिला को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की। इस तरह से वह ट्यूनीशिया की पहली महिला प्रधानमंत्री होंगी।

अपने फेसबुक पेज पर इसकी घोषणा करते हुए राष्ट्रपति ने एक बयान जारी कर कहा, “राष्ट्रपति कैस सईद ने नाजला बूदेन रमधाने को जल्द से जल्द नई सरकार बनाने के लिए अधिकृत किया है” कैस सईद ने एक वीडियो संदेश में कहा कि “ट्यूनीशिया के इतिहास में पहली बार, एक महिला प्रधानमंत्री सरकार का नेतृत्व करेगी” उन्होंने कहा देश की समस्याओं से निपटने के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता के साथ मिलकर काम करेंगे।

इंजीनियरिंग की प्रोफेसर से पीएम तक रिपोर्ट्स के मुताबिक नाजला बूदेन के बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं है, लेकिन वह पेशे से इंजीनियरिंग स्कूल में पढ़ाती हैं और वर्ल्ड बैंक के लिए काम कर चुकी हैं। राष्ट्रपति ने नाजला को प्रधानमंत्री नियुक्त करने के अपने फैसले के बारे में भी कोई विशेष जानकारी नहीं दी।

63 वर्षीय नाजला का जन्म केंद्रीय ट्यूनीशिया के कैरौन में हुआ था और वह राजधानी में नेशनल स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं। उन्हें 2011 में उच्च शिक्षा मंत्रालय में महानिदेशक पद पर नियुक्त किया गया था। हालांकि उन्हें राजनीति में कोई विशेष अनुभव नहीं है।

नाजला रमधाने ऐसे समय में एक उच्च राजनीतिक स्थान हासिल कर रही हैं, जब देश एक गंभीर राजनीतिक संकट की चपेट में है। सिर्फ दो महीने पहले राष्ट्रपति ने एकतरफा कदम उठाया और प्रधानमंत्री हिचिम मेशिशी को बर्खास्त कर दिया और संसद को भंग कर दिया था। राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति के इस कदम को “तख्तापलट” करार दिया था।

2019 के राष्ट्रपति चुनाव के पहले कैस सईद को एक बहुत ही प्रतिष्ठित कानून के प्रोफेसर के तौर पर जाना जाता था। उनसे बड़ी उम्मीदें जुड़ी हुई थीं। शायद यही कारण है कि वाम मोर्चा और इस्लामी दलों समेत लगभग सभी राजनीतिक दलों ने उनको समर्थन की घोषणा की थी लेकिन सत्ता में आने के बाद से कई तबकों ने उनकी तीखी आलोचना की। कभी पुलिस की बर्बरता के लिए तो कभी कोरोना वायरस महामारी को ठीक से नियंत्रित करने में विफल रहने के लिए उनकी आलोचना की गई। देश इस समय भीषण आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है।

इस साल की शुरुआत में राजधानी में उनके प्रशासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हुए जिसे कुचलने के लिए पुलिस ने अत्यधिक बल का प्रयोग किया। फिर 25 जुलाई को राष्ट्रपति ने संसद को भंग करने का एक विवादास्पद फैसला लिया। अभी पिछले हफ्ते ही उन्होंने ऐलान किया था कि अब वो देश को खुद चलाएंगे।

बुधवार को ही जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल ने कैस सईद से फोन पर बात की और देश की स्थिरता के लिए लोकतंत्र के महत्व पर जोर दिया। चांसलर के प्रवक्ता के मुताबिक मैर्केल ने राष्ट्रपति से “संसदीय लोकतंत्र को बहाल करने के लिए सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत शुरू करने” के लिए कहा था।

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