नई दिल्ली

यूक्रेन संकट से लगा झटका भारत में भी घर-घर तक होगा महसूस, महंगाई की चपेट में होगा देश, तेजी से और बढ़ेंगे दाम ..

नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल-डीजल की कमर तोड़ महंगाई से लोग हलाकान और परेशान हैं। इस बीच यूक्रेन की सीमा पर हमले की पुतिन की चेतावनी के बाद दुनिया भर के शेयर बाजार चरमरा गए। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 2,000 अंक टूट गया। 24 फरवरी को निफ्टी 570 अंक गिरकर 16,500 अंक से नीचे चला गया। 2004 के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के निशान पर पहुंच गईं।

घरेलू बाजार में सोने की कीमत 51,400 रुपये को पार कर गई, जो पिछले कुछ महीनों में सबसे ज्यादा है। ये दिखाता है कि रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ा है।

बढ़ते रूस-यूक्रेन संकट की आग को करोड़ों भारतीयों को भी झेलना पड़ सकता है। क्षेत्र में तनाव से उपयोगी वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आएगी।

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 4 नवंबर, 2021 से स्थिर बनी हुई हैं। भारतीय मध्यम वर्ग को कुछ राहत देने के लिए, केंद्र सरकार ने पिछले साल नवंबर में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में क्रमशः 5 रुपये और 10 रुपये की कटौती की थी। केंद्र के इस कदम के बाद, कई राज्यों ने ईंधन की कीमतों पर मूल्य वर्धित कर (वैट) को कम करने की भी घोषणा की। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत रिकॉर्ड उच्च स्तर पर चढ़ने के साथ, तेल मार्केटिंग कंपनियां जल्द ही ईंधन की कीमतों में संशोधन कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना ​​था कि भारत में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव समाप्त होने के बाद मार्च की शुरुआत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलेगा।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार तड़के यूक्रेन में सैन्य अभियान की घोषणा की है। रूसी सेना ने गुरुवार को ओडेसा के यूक्रेन काला सागर बंदरगाह और डोनेट्स्क के पूर्वी यूक्रेनी क्षेत्र मारियुपोल सहित कई यूक्रेनी शहरों पर मिसाइलें दागीं।

रूसी सरकारी टेलीविजन पर पुतिन की घोषणा के तुरंत बाद, यूक्रेन की राजधानी कीव में कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई। फिर, विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा कि रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किया है और हथियारों के हमलों के साथ शहरों को निशाना बना रहा है।

कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट नवनीत दमानी के हवाले से लिखा, “विश्व स्तर पर खपत होने वाले हर 10 बैरल तेल में से एक हिस्सा रूस का होता है, इसलिए जब तेल की कीमत की बात आती है तो यह एक प्रमुख खिलाड़ी है और यह वास्तव में पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने वाला है।”

रूस-यूक्रेन युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान खाद्य कीमतों में वृद्धि हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से मुद्रास्फीति, राजकोषीय और बाहरी क्षेत्र के जोखिम पैदा होंगे। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) बास्केट में कच्चे तेल से संबंधित उत्पादों की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी 9 प्रतिशत से अधिक है। दमानी ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से एलपीजी और केरोसिन पर सब्सिडी बढ़ने की भी उम्मीद है, जिससे सब्सिडी बिल में बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से परिवहन लागत में वृद्धि होगी और यह बाद में आपके खाद्य बिल की लागत में वृद्धि करेगा।

यूक्रेन और रूस एक साथ वैश्विक गेहूं, मक्का और सूरजमुखी के तेल में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं। इस क्षेत्र पर संकट का असर दुनिया भर में फसल उत्पादन और आवाजाही पर पड़ेगा। पाम तेल और सोया तेल की कीमतें अल्पावधि में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसलिए, भारत का आयात बिल बढ़ना तय है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2022-23 (FY23) में भारत का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 8 से 8.5 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। विकास का अनुमान कुछ मान्यताओं पर आधारित है जिनमें- आगे कोई महामारी संबंधी आर्थिक व्यवधान नहीं होगा, एक सामान्य मानसून, प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा वैश्विक तरलता की निकासी मोटे तौर पर व्यवस्थित होगी, तेल की कीमतें $70-75 प्रति बैरल रेंज में होंगी, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान लगातार कम होंगे। लेकिन यूक्रेन संकट को देखते हुए ये सब स्थिर बना रहे ऐसा संभव नहीं है।

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