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दिल्ली दरबार: यूपी की सियासत में चुप्पी कहीं बड़ा संकेत तो नहीं …

नई दिल्ली (पंकज यादव) । उत्तर प्रदेश की सियासत में भाजपा में मचा तूफान अचानक शांत होता दिख रहा है। लेकिन क्या सचमुच में शांत हो गया है ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। क्योंकि जिस तरीके से भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी सामने आई है माना जा रहा है कि अभी बहुत सी तस्वीर बाकी है। क्योंकि कई बार चुप्पी के बाद भी भूचाल नजर आता है। ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश में होने वाला है।

सूत्रों के मुताबिक अभी तक किसी भी केंद्रीय नेता ने उत्तर प्रदेश की सियासत को लेकर मुंह नहीं खोला है। यह अलग बात है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अखबार को इंटरव्यूह देकर मामले को शांत करने का प्रयास किया है। योगी ने प्रधानमंत्री की भी तारीफ की है। लेकिन एकतरफा तारीफ से क्या मामला शांत हो गया है यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। भाजपा की सियासत में साल 2014 के बाद जो बड़ा बदलाव हुआ है वह यह है कि पार्टी में कब, कौन,कहां, किस पद पर बैठा दिया जाए और कब हटा दिया जाए यह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक को नहीं पता चल पाता। यानी कहां से रणनीति तैयार हो रही है इसकी भनक भी नहीं लगती। ताजा उदाहरण उत्तराखंड का है जहां रातोरात मुख्यमंत्री बदल दिया जाता है और कौन बनेगा मुख्यमंत्री इसकी जानकारी प्रदेश के दिग्गज नेताओं को भी नहीं होती है।

नेतृत्व परिवर्तन की जो कवायद भाजपा करती है वह किसी दूसरे दलों में जल्दी नहीं दिखता। यानी भाजपा के एक आम कार्यकर्ता को भी उम्मीद जग जाती है कि उसके भी भाग्य का पिटारा खुल जाएगा। 2017 में स्वयं योगी आदित्यनाथ को भी नहीं पता था कि राज्य की कमान उनको सौंपी जा रही है। लेकिन जो कुछ भी हुआ अप्रत्याशित था। लेकिन आज जो हो रहा है वह भी अप्रत्याशित है कि मुख्यमंत्री को अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है। लेकिन सूत्र बता रहे हैं कि अभी उत्तर प्रदेश का मामला शांत नहीं हुआ है। जो भी कुछ होगा अचानक ही होगा।

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