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मातर उत्सव पर राजिम में कवि सम्मेलन का आयोजन …

राजिम। भाई बहन के अमर प्रेम के प्रतीक भाई दूज का पर्व छत्तीसगढ़ सहित पूरे अंचल में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। राउत बन्धुओं के नेतृत्व में गांव-गांव में मातर महोत्सव का आयोजन हुआ। इसी कड़ी में आदर्श ग्राम पाहन्दा में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन बाल समाज मानस एवम सांस्कृतिक मंच पाहन्दा के बैनर तले समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीरामचन्द्र की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इसके बाद रायपुर से पधारे लोकप्रिय कवि व गीतकार मीर अली मीरजी ने माँ शारदे की भक्तिमय वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का शानदार आगाज किया। तत्पश्चात मंच संचालक कवि श्रवण कुमार साहू ने प्रथम कवि के रूप में पैरोडी के उस्ताद मकसूदन साहू, को आमंत्रित किया तो उन्होंने छत्तीसगढ़ी रोटी पीठा व कोको कोला बाय बाय पढ़कर रोमांच को चरम पर पहुँचा दिया। युवा कवि छग्गु यास ने अपनी छोटी-छोटी क्षणिकाओं के द्वारा लोगों को गुदगुदाए रखा।

तत्पश्चात माधुर्य गीतों के रचनाकार रोहित साहू ने अपने चिर परिचित अंदाज में भाई दूज पर विशेष रचना “आगे-आगे भाई-बहिनी के तिहार, दीदी ओ मोला निक लागत हे,” सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उसके बाद बारी थी मीर अली मीरजी की, जिन्होंने नंदा जहि का रे,, एवम बेटियों और वृद्धों पर लाजवाब रचना पढ़कर छत्तीसगढ़ी परम्परा को याद करते हुए भाव विभोर कर दिया।

स्थानीय युवा कवि ताराचंद साखरे ने अपने गांव की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए ताबड़तोड़ प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। राजिम से पधारे कवि श्रवण कुमार साहू ने “दुनिया के हाल देख के सोचई होगे रे, आज घरों घर मखना कोचई होगे रे, के माध्यम से समाज पर हास्य व्यंग्य से प्रहार करते हुए धमाकेदार प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी। हास्य-व्यंग्य व अनेक समसामयिक विषयों पर कवियों की प्रस्तुति देखकर दर्शक देर रात तक व पूरे समय डटे रहे। कार्यक्रम संचालन श्रवण कुमार ने किया और आभार प्रदर्शन ताराचंद साखरे ने किया।

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