लखनऊ/उत्तरप्रदेश

कोडीन कफ सिरप की अवैध सप्लाई का नेटवर्क खंगाल रही STF, फर्जी फर्मों और मेडिकल लाइसेंस की जांच तेज

 लखनऊ
 कोडीनयुक्त कफ सीरप की अवैध आपूर्ति के मामले में लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में दर्ज मुकदमे के आधार पर गिरफ्तार सहारनपुर के दवा कारोबारी भूपेंद्र सिंह चौहान से पूछताछ में कई अहम तथ्य सामने आए हैं।

कई दवा कारोबारी और पदाधिकारी नौकर और कर्मचारियों के नाम पर फर्म से कोडीन का कारोबार करने में शामिल हैं। ऐसे में एसटीएफ अब लखनऊ के मेडिसिन जांच में विभोर राणा और विशाल सिंह के नेटवर्क का जिक्र आया है।

सचिन मेडिकोज का पंजीकरण बिट्टू कुमार और मारुति मेडिकोज का सचिन कुमार के नाम पर होने की जानकारी भी जांच में सामने आई थी।

एबी फार्मास्यूटिकल्स समेत अन्य फर्मों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। एसटीएफ की पूछताछ में भूपेंद्र से सामने आए नामों का मिलान फर्मों के दस्तावेजों, खरीद-बिक्री और भुगतान के रिकार्ड से शुरू कर दिया है।

जांच में जून से अगस्त 2022 के बीच पश्चिमी प्रदेश के विभिन्न जिलों में करीब 100 स्टाकिस्टों को बिलिंग किए जाने का मामला भी सामने आया है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, अलीगढ़, बुलंदशहर और शामली के स्टाकिस्टों को हुई बिलिंग की जांच की जा रही है।

वेट एजेंसीज, जीआर ट्रेडिंग और बीएन फार्मास्यूटिकल्स जैसी फर्मों के जरिए दिखाई गई खरीद-बिक्री, वास्तविक आपूर्ति और भुगतान के रास्तों की जानकारी जुटाई जा रही है। एसटीएफ स्टाकिस्टों के मेडिकल लाइसेंस जारी होने की तारीख, आवेदन और पंजीकरण संबंधी दस्तावेज भी खंगाल रही है। लाइसेंस जारी करने वाले औषधि विभाग के अधिकारियों की भूमिका और नियमों के पालन की भी जांच की जा रही है।

लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी थाने में वर्ष 2024 में दर्ज मुकदमे की जांच में फर्जी फर्मों के जरिए बिलिंग और दूसरे राज्यों तक सीरप की अवैध आपूर्ति के आरोप सामने आए थे।

शुभम जायसवाल और उसके सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। कृष्णानगर पुलिस की पूर्व कार्रवाई में गिरफ्तार सूरज मिश्रा, प्रीतम सिंह उर्फ मोंटी सरदार और दीपक मनवानी से जुड़े खरीद-बिक्री के रिकार्ड का भी मिलान किया जा रहा है।

एसटीएफ दवा कारोबार से जुड़े संगठनों के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका भी खंगाल रही है। शुभम जायसवाल और अन्य आरोपितों के साथ एक पदाधिकारी की तस्वीरें सामने आने के बाद उनके कारोबारी संपर्कों और संबंधित फर्मों के लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। जांच का उद्देश्य कथित नेटवर्क में बिलिंग, आपूर्ति और संभावित संरक्षण की कड़ियों को जोड़ना है।

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