छत्तीसगढ़

खेल के मैदान से स्वरोजगार की ओर—पुष्पेन्द्र के ‘एक्सट्रीम फिटनेस हब’ से 600 युवाओं को मिल रही सेहत की नई दिशा

खेल के मैदान से स्वरोजगार की ओर—पुष्पेन्द्र के 'एक्सट्रीम फिटनेस हब' से 600 युवाओं को मिल रही सेहत की नई दिशा

​रायपुर

       ​दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं का सहारा मिले तो दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं के सपने भी उड़ान भर सकते हैं। नारायणपुर जिले के पुष्पेन्द्र शर्मा की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। कभी मैदान पर युवाओं को क्रिकेट की बारीकियां सिखाने वाले पुष्पेन्द्र आज 'एक्सट्रीम फिटनेस हब' के जरिए जिले के 600 से अधिक युवाओं और नागरिकों को स्वास्थ्य एवं फिटनेस की सुविधा दे रहे हैं।
    
​क्रिकेट कोचिंग से हुई शुरुआत

     पुष्पेन्द्र शर्मा का सफर क्रिकेट कोचिंग से शुरू हुआ था। वे स्थानीय क्रिकेट क्लब में बतौर कोच बच्चों और युवाओं को प्रशिक्षित कर अंडर-19 स्तर तक तैयार करते थे। खिलाड़ियों के साथ काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि खेल कौशल को निखारने के लिए बेहतर शारीरिक फिटनेस और नियमित व्यायाम बेहद जरूरी है। नारायणपुर में अत्याधुनिक जिम और फिटनेस सेंटर की कमी उन्हें हमेशा खलती थी।

​वित्तीय संकट और जिला उद्योग केंद्र का सहारा

      नारायणपुर में एक सर्वसुविधायुक्त फिटनेस सेंटर खोलने का विचार तो पुष्पेन्द्र के मन में आ गया, लेकिन सीमित आर्थिक संसाधन सबसे बड़ी बाधा थे। इस मोड़ पर उन्होंने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, नारायणपुर से संपर्क किया। विभाग के अधिकारियों ने उनकी कार्ययोजना को समझा और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत ऋण का प्रकरण तैयार कर स्वीकृति हेतु बैंक भेजा।

​5 लाख की लागत से साकार हुआ सपना

       योजना के तहत केनरा बैंक से प्राप्त वित्तीय सहायता से पुष्पेन्द्र का सपना साकार हुआ। कुल 5 लाख रुपये की लागत से नारायणपुर के बंगलापारा में 'एक्सट्रीम फिटनेस हब' की नींव रखी गई। इस प्रोजेक्ट में 90 प्रतिशत राशि बैंक ऋण से और शेष 10 प्रतिशत राशि पुष्पेन्द्र की अपनी पूंजी से जुटाई गई।

​600 से अधिक सदस्य ले रहे लाभ

       शुरुआत में एक व्यावसायिक पहल के रूप में शुरू हुआ यह सेंटर आज नारायणपुर के युवाओं और नागरिकों के लिए सेहत का केंद्र बन चुका है। वर्तमान में यहाँ 600 से अधिक पंजीकृत सदस्य नियमित रूप से व्यायाम और फिटनेस प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

​स्वरोजगार से समाज सेवा की मिसाल

      पुष्पेन्द्र शर्मा बताते हैं कि नारायणपुर जैसे क्षेत्र में सीमित पूंजी के साथ जिम शुरू करना आसान नहीं था। शासकीय योजना, अधिकारियों के मार्गदर्शन और केनरा बैंक से मिली वित्तीय सहायता ने मेरे विचार को धरातल पर उतारा।
​'सेवा संकल्प अभियान' के तहत पुष्पेन्द्र शर्मा की यह यात्रा यह साबित करती है कि अगर सही दिशा में कदम बढ़ाए जाएं, तो सरकारी योजनाएं न केवल एक व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए सकारात्मक बदलाव का माध्यम भी बनती हैं।

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