नई दिल्ली

गुजरात पर राजस्थान के मेवाड़ में ‘चिंतन’ करेगी कांग्रेस, भाजपा के चक्रव्यूह को तोड़ने का खाका होगा तैयार …

उदयपुर। मेवाड़ में कांग्रेस के चिंतन शिविर में अलग मायने हैं। दरअसल गुजरात में इसी साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। उदयपुर संभाग गुजरात सीमा से लगता है। बांसवाड़ा, डूंगरपुर व उदयपुर जिला पूरी तरह से जनजाति बाहुल्य है और सीमा के उस पार गुजरात के जिले भी आदिवासी बाहुल्य हैं। यहां के ज्यादातर लोग रोजगार, खरीदारी व इलाज के लिए गुजरात जाते हैं। रतनपुर बॉर्डर से लेकर अहमदाबाद, सूरत और बड़ौदा तक मेवाड़ के रहने वाले लोग काम धंधा व नौकरी कर रहे हैं। यही वजह है के कांग्रेस ने चिंतन के लिए उदयपुर को चुना है।

राजस्थान के उदयपुर में होने वाले कांग्रेस के नव संकल्प चिंतन शिविर में एक दिन पूरा गुजरात पर ही चिंतन होगा। इस शिविर में गुजरात में दो दशक से लगातार जीत रही भाजपा की अटूट लकीर को तोड़ने का खाका तैयार किया जाएगा। कांग्रेस के चिंतन शिविर की उदयपुर में तैयारियां शुरू हो चुकी है। उदयपुर में दो लग्जरी होटलों को बुक करवा दिया गया है। स्थानीय स्तर पर भी कार्यकर्ताओं को ठहराने व वाहनों के इंतजाम किए जा रहे हैं। प्रदेश प्रभारी अजय माकन 4 मई को चिंतन शिविर की तैयारियों का जायजा लेने के लिए उदयपुर आ रहे हैं।

कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि नव संकल्प चिंतन शिविर में गुजरात में चुनाव जीतने को लेकर रणनीति तय की जाएगी। यही वजह है कि गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के शीर्ष पदाधिकारी, शहर व जिला स्तर के पदाधिकारियों को आमंत्रित करने की संभावना है। इसमें गुजरात में अधिक से अधिक सीटें जीतने का खाका तैयार किया जाएगा। आदिवासी क्षेत्र के साथ ही गुजरात के किसानों को भी टारगेट किया जा रह है। यही वजह है कि डूंगरपुर में आयोजित होने वाले पाटीदार महासम्मेलन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद शिरकत करने आए हैं।

इस चिंतन शिविर में उदयपुर, बांसवाड़ा व डूंगरपुर के आदिवासी नेताओं का सियासी भविष्य तय हो सकता है। यहां के कद्दावर नेताओं को गुजरात के कुछ इलाकों की कमान दी जा सकती है। उन्हें गुजरात में टारगेट के साथ काम सौंपा जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले सियासी नेताओं को ईनाम भी दिया जा सकता है। दूसरी ओर पार्टी का मानना है कि मेवाड़ में सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पार्टी भी राज्य की सत्ता में काबिज होती है। गुजरात यहां से नजदीक भी है।

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक इस शिविर में देशभर से कांग्रेस के सांसद और विधायकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। सभी प्रदेश के शीर्ष पदाधिकारियों को भी इस शिविर में शामिल किया जाएगा। इसका मकसद साल 2024 में होने वाले आम चुनाव और इस साल गुजरात, हिमाचल प्रदेश, अगले साल राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक आदि राज्यों के चुनावों की रणनीति तैयार की जाएगी।

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