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जनजातीय समुदाय के हितों के सरंक्षण के लिए जगदेव राम ने पूरा जीवन समर्पित कर दिया: राज्यपाल उइके

रायपुर । राज्यपाल अनुसुईया उइके ने आज राजभवन के दरबार हॉल में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय जगदेव राम उरांव के जीवन पर आधारित सचित्र पुस्तक ‘‘हमारे जगदेव राम जी’’ का विमोचन किया। इस अवसर पर बिंदेश्वर भगत, योगेश बापट, पूर्व राज्यसभा सदस्य श्रीगोपाल व्यास, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ए.डी.एन. वाजपेयी सहित वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने कहा कि मुझे भी जगदेव राम के मार्गदर्शन का लाभ मिला था और जनजातीय समाज की समस्याओं के संदर्भ में उनसे हमेशा चर्चा होती थी। उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह जनजातीय समुदाय के हितों के सरंक्षण के लिए समर्पित कर दिया था। उनकी सहजता, सरलता स्वतः सबको आकर्षित करती थी। वे हर कार्यकर्ता की चिंता करते थे। उनकी छोटी-छोटी समस्याओं का ध्यान रखते थे और कई बार स्वयं दूरभाष तथा अन्य माध्यमों से संपर्क कर कार्यकर्ता के परिवार का हालचाल जाना करते थे। उरांव जब संस्था की बागडोर संभाले तो जनजातीय समाज के कल्याण के लिए अनेक उल्लेखनीय कार्य किए। वे आज हमारे बीच नहीं है। इस अवसर पर आज हम संकल्प लें कि जो काम छोड़ के गए हैं, उसे हम पूर्ण करें।

राज्यपाल ने कहा कि एक सामान्य से परिवार में जन्मे उरांव ने ऐसा काम करके दिखाया, जो वर्षों तक समाज को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने अपनी शिक्षा-दीक्षा पूर्ण करने के पश्चात, वनवासी कल्याण आश्रम में शिक्षक का दायित्व निभाया। वहां पर वनवासी कल्याण आश्रम के संस्थापक बालासाहब देशपाण्डे से उनका संपर्क हुआ। इसके साथ ही उनके जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आया। उनकी प्रतिभा पहले से निखर कर सामने आई और बाद में उन्होंने कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार भी ग्रहण किया। जगदेव राम 25 वर्षों तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। अपने कार्यकाल में उन्होंने जनजातीय हित रक्षा, ग्राम विकास, खेलकूद महिला सशक्तीकरण के कार्य जैसे अनेक आयामों की शुरूआत की। उनके नेतृत्व में कल्याण आश्रम ने नई ऊंचाईयों को छुआ और संगठन को विस्तार भी मिला। वे हमारे बीच नहीं है, परन्तु उन्होंने आचार-विचार और संस्कार की, वो सीख देकर गए हैं, जिससे पूरे समाज को दीन-दुखियों की सेवा करने की प्रेरणा मिलती है। यह सचित्र पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को जनजातीय विकास के लिए सतत् कार्य करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

राज्यपाल ने कहा कि वे स्वयं कल्याण आश्रम से जुड़ी रहीं और इस माध्यम से जनजातियों के कल्याण के लिए कार्य करती रही। मैं जब स्वयं सार्वजनिक जीवन में आई तो मैंने जनजातीय समाज के समस्याओं को करीब से देखा और उसे दूर करने का प्रयास किया। आज भी कोशिश रहती है कि उनके समस्याओं का मैं समाधान कर सकूं। सुश्री उइके ने कहा कि जगदेव राम से मुलाकात होती रहती थी। वे मुझे समय-समय पर समाज के लिए कार्य करने के लिए मार्गदर्शन दिया करते थे। राज्यपाल ने कल्याण आश्रम जनजातियों के कल्याण के लिए जो कार्य कर रही है, वह अतुलनीय है। उन्होंने जनजातीय समाज के बच्चों की शिक्षा के लिए बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं। इस संस्था के कार्यकर्ता जनजातीय समाज के मध्य जाकर सेवा कार्य करते हैं। इससे सभी को प्रेरणा मिलती है।

राज्यपाल ने कहा कि मेरी भी हमेशा यह कोशिश रहती है कि जनजातीय समुदाय के अधिकारों और हितों के लिए कार्य करूं। उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए मैं केन्द्र स्तर पर भी प्रयास करती हूं। उन्होंने कहा कि आज वनवासी समाज को स्वयं जागरूक रहने की जरूरत है। कार्यक्रम को बिंदेश्वर भगत और योगेश बापट ने संबोधित किया।

 

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