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गृहमंत्री अमित शाह अचानक गुजरात पहुंचे थे गुजरात, फिर गिराई रूपाणी पर इस्तीफे की गाज …

नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी  में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। मोदी सरकार को अंदेशा है कि आने वाले चुनावों में भाजपा को गुजरात से करारी शिकस्त मिल सकती है। इसी आशंका के चलते रात के अंधेरे में गृहमंत्री अमित शाह अचानक गुजरात पहुंच गए और पूर्व तैयारी के साथ रुपाणी को विश्वास में लिए बिना इस्तीफा दिलवा दिया। सूत्र कहते हैं कि आने वाले दिनों में रूपणी के करिबी मंत्रियों से भी जबरन इस्तीफा लिए जाने की कार्रवाई की जाएगी। संभावना व्यक्त की जा रही है कि इससे पार्टी में दो फाड़ की स्थिति निर्मित होगी और अंतरिक कलह चरम पर भी पहुंच सकता है। पार्टी इसे लेकर भी भारी चिंता में है और मीडिया मैनेजमेंट के काम पर उपयुक्त व्यक्ति को लगा दिया गया है।

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात में मुख्यमंत्री बदलकर सबको फिर से चौंका दिया है। विजय रूपाणी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और अब उनके उत्तराधिकारी को लेकर भारतीय जनता पार्टी में मंथन का दौर जारी है। माना जा रहा है कि विजय रूपाणी के बाद कुछ मंत्रियों पर भी गाज गिर सकती है। बीजेपी अगले विधानसभा चुनाव में किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती, इसलिए उसने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही मुख्यमंत्री के चेहरे को बदलने का फैसला लिया। हालांकि, यह फैसला इतना आसान नहीं था क्योंकि इस अहम घटनाक्रम में खुद केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह को एंट्री लेनी पड़ी।

अमित शाह के दखल के बाद ही इतनी आसानी से गुजरात में यह सबकुछ संभव हो पाया। माना जाता है कि विजय रूपाणी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कीरीबी दोस्त हैं। विजय रूपाणी के इस्तीफे से एक दिन पहले अचानक अमित शाह गुजरात के दौरे पर गए थे। अंग्रेजी वेबसाइट ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि अमित शाह शुक्रवार की रात में गुजरात पहुंचे थे और अगली सुबह वापस आ गए थे। ऐसा कहा जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने बीजेपी के सीनियर नेताओं के साथ बैठक की थी और इसी बैठक में विजय रूपाणी के इस्तीफे को लेकर फैसला हुआ था।

देर रात काफी देर तक मंथन के बाद इस बैठक में यह तय हो गया था कि विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा। हालांकि, इस बैठक के फैसले को काफी गुप्त रखा गया और अगली सुबह अमित शाह वापस दिल्ली आ गए। जब शनिवार को विजय रूपाणी राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मिलने जा रहे थे, तब भी लोगों को यह अंदेशा नहीं था कि वह इस्तीफा देने जा रहे हैं। मगर कई तरह के कयासों से बीच शनिवार को दोपहर में विजय रूपाणी ने इस्तीफा दे दिया।

फिलहाल, गुजरात के अगले मुख्यमंत्री पर असमंसज की स्थिति आज यहां भारतीय जनता पार्टी के विधायक दल की बैठक के बाद खत्म हो जाएगी। दरअसल विजय रूपाणी के गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद अगले मुख्यमंत्री की तलाश शुरू हो गयी है। केंद्रीय पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह तोमर ने रविवार सुबह भाजपा के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष सी आर पाटिल से मुलाकात की। तोमर भी विधायक दल की बैठक में भाग लेंगे। भाजपा ने नए मुख्यमंत्री के चयन के लिए विधायक दल की बैठक के वास्ते केंद्रीय मंत्री तोमर और प्रह्लाद जोदी को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रूपाणी ने किस वजह से इस्तीफा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात की 182 विधानसभा सीटों के लिए दिसंबर 2022 में चुनाव होने हैं। रूपाणी (65) कोरोना वायरस महामारी के दौरान भाजपा शासित राज्यों में पद छोड़ने वाले चौथे मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने दिसंबर 2017 में मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरी पारी के लिये पद की शपथ ली थी। मोदी को इस राज्य में भाजपा के करारी शिकस्त होने का अंदेशा है, जिसके बाद पीएम मोदी के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है।

उन्होंने राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मुलाकात और उन्हें इस्तीफा पत्र सौंपने के बाद पत्रकारों से कहा था मैंने गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। मुझे पांच साल तक राज्य की सेवा करने का मौका दिया गया। मैंने राज्य के विकास में योगदान दिया। मेरी पार्टी जो कहेगी, आगे मैं वही करूंगा। रूपाणी सबसे पहले आनंदीबेन पटेल के इस्तीफे के बाद सात अगस्त 2016 को गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे और वह 2017 विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत के बाद पद पर बने रहे।

 

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