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गांधी हमारे अभिमान: CM भूपेश बोले- देश विभाजन के लिए गांधी नहीं, जिन्ना और सावरकर हैं जिम्मेदार …

रायपुर। छत्तीसगढ़ के धर्म संसद में महात्मा गांधी पर अपमानजनक टिप्पणी के बाद उठे सियासी बवंडर और कालीचरण महाराज की गिरफ्तारी के बाद शुक्रवार को रायपुर में गांधी हमारे अभिमान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें सीएम भूपेश बघेल सहित कई मंत्री, कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए और मौन धरना दिया। कार्यक्रम में रघुपति राघव राजा राम, गांधी मेरा अभिमान सबको सन्मति दे भगवान जैसे भजन गाए गए। इस दौरान सीएम भूपेश बघेल ने किसी का नाम लिए बगैर भाजपा के नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार गांधी के रास्ते पर चल रही है और धर्म के नाम पर लोगों को बांटने वाले गोडसे और सावरकर की राह पर चल रहे हैं। देश विभाजन के लिए गांधी नहीं जिन्ना और सावरकर जिम्मेदार हैं।

सीएम भूपेश ने कहा कि हम नेहरू और गांधी के समाज को खंडित नहीं होने देंगे। सीएम ने धर्म संसद में गांधी पर अपशब्द कहने वाले कालीचरण महाराज की गिरफ्तारी पर छत्तीसगढ़ पुलिस को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे तथाकथित व्यक्ति को पकड़कर पुलिस ने कोर्ट में खड़ा कर दिया। भूपेश ने कालीचरण को गालीचरण कहकर भी संबोधित किया। सीएम ने कहा कि दो दिन का धर्म संसद था, जिसमें धार्मिक बातें होती, सुधार की बात करते, लेकिन महात्मा का अपमान किया गया। उन्होंने कहा कि सुभाष चंद्र बोस के विचार महात्मा गांधी से अलग थे, वैचारिक मतभेद थे, लेकिन रंगून से रेडियो के जरिए उन्होंने महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कहा था।

मुख्यमंत्री सहित कांग्रेसियों ने ली शपथ

सीएम भूपेश ने कहा कि गांधीजी ने छत्तीसगढ़ के सुंदरलाल शर्मा को अपना गुरू कहा। गांधीजी ने श्रम और मेहनत का सम्मान किया। विवेकानंद ने शिकागो के धर्म संसद में कहा था कि हम विश्व के सभी धर्मों को स्वीकार करते हैं। हमने सताए लोगों को अपने यहां स्थान दिया है। विवेकानंद को विवेकानंद बनाने में छत्तीसगढ़ की माटी का भी अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने वालों से सावधान रहने की जरूरत है। ऐसे लोग समाज के लिए कोढ़ हैं। सीएम ने कहा कि कोरोना संकट के दौर में आर्थिक मदद करने की जरूरत है न कि धर्म को लेकर लड़ाई करने की। कार्यक्रम के दौरान सीएम बघेल के साथ सभी कांग्रेस नेताओं ने शपथ भी लिया। हम सब शपथ लेते हैं गांधीजी के मुंह से निकले अंतिम शब्द हे राम की वेदना तथा उनके द्वारा प्रतिपादित शाश्वत मूल्यों को आत्मसात करेंगे तथा जन-जन तक उन्हें पहुंचाने, उनको सदा जीवंत रखने हेतु निरन्तर प्रयत्नशील होंगे।

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