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कृषि कानून के बाद CAA-NRC कानून भी होंगे वापस, नरेंद्र मोदी के मंत्री ने कही ये बात …

नई दिल्ली। मोदी सरकार द्वारा किसान विरोधी तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करने व माफी मांगने के बाद जहां किसानों में खुशी का माहौल है, वहीं विपक्षी दल इसे किसानों के संघर्ष की जीत बता रहे हैं। नरेंद्र मोदी के इस कदम के बाद अब नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में महीनों तक आंदोलन कर चुके लोगों के मन में भी इन कानूनों की वापसी को लेकर एक नई उम्मीद जगने लगी है।

केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने शनिवार को कहा कि विपक्ष को नरेंद्र मोदी के कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले का स्वागत करना चाहिए। कृषि कानून वापस लेने के बाद विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं है। विपक्ष सोच रहा है कि कृषि कानून वापस हो गए तो CAA-NRC भी वापस हो जाएगा। जो लोग CAA-NRC वापस करने की मांग कर रहे हैं, वे गलतफहमी के शिकार हैं। केंद्रीय कैबिनेट में आवास एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री का पद संभाल रहे कौशल किशोर उत्तर प्रदेश की मोहनलाल गंज सीट से भाजपा सांसद हैं।

जानकारी के अनुसार, नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुरु पर्व के अवसर पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों को निरस्त करने की अचानक घोषणा करने के साथ ही किसानों से माफी मांगी थी। नरेंद्र मोदी ने कहा था कि तीनों कृषि कानून किसानों के फायदे के लिए थे, लेकिन हमारे प्रयासों के बावजूद हम किसानों को मना नहीं पाए।

देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने की नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद शुक्रवार को कहा था कि अब सरकार को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को भी निरस्त कर देना चाहिए। वहीं, अमरोहा से बसपा के लोकसभा सांसद कुंवर दानिश अली ने भी कहा कि नरेंद्र मोदी को सीएए को निरस्त करने के बारे में भी तत्काल विचार करना चाहिए।

जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने एक बयान में कहा था कि हम तीनों कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की घोषणा का स्वागत करते हैं। किसानों को हम मुबारकबाद देते हैं। उनके मुताबिक, किसान आंदोलन को भी कहीं न कहीं सीएए विरोधी आंदोलन से प्रेरणा मिली।

मौलाना मदनी ने कहा कि प्रधानमंत्री सही कहते हैं कि हमारे देश का ढांचा लोकतांत्रिक है। ऐसे में अब उन्हें उन कानूनों की ओर भी ध्यान देना चाहिए, जो मुसलमानों से जुड़े हैं। कृषि कानूनों की तरह सीएए को भी वापस लिया जाए।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद पिछले साल 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 700 अन्य घायल हुए थे। साथ ही सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा था। उग्र भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूंक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया था।

दिल्ली पुलिस द्वारा साम्प्रदायिक दंगों को लेकर 750 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। दंगों से जुड़े मामलों में अब तक 250 से ज्यादा चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं, जिनमें कई आरोपियों को चार्जशीट किया जा चुका है।

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