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छत्तीसगढ़ के यश्स्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अपील का दिखा असर 33 जिलों में हुआ भारी मात्रा में पैरादान, रायपुर पहले, जांजगीर-चांपा दूसरे और धमतरी तीसरे स्थान पर …

रायपुर। छत्तीसगढ़ के यश्स्वी मुख्यमंत्री भूपेश ने प्रदेश के किसानों से पैरादान करने की अपील का व्यापक असर हुआ है। प्रदेश भर में किसान पैरादान कर रहें है। पिछले दो माह में लगभग 13 लाख 89 हजार क्विंटल से अधिक पैरा गौठानों में संग्रहित किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने पैरादान को महादान की संज्ञा देते हुए कहा है कि किसान अपने खेतों में पैरा जलाने के बजाए गौठान में दान करें इससे प्रदूषण से राहत मिलेगी और पशुओं को चारा भी मिलेगा। इसके अलावा पैरा का उपयोग वर्मी कम्पोस्ट बनाने में किया जा सकेगा।गौरतलब है कि भेंट-मुलाकात अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों पर मुख्यमंत्री ने किसानों से पैरादान करने की अपील कर रहें है। इसका असर अब गंाव-गांव में दिखने लगा है। किसान स्वमेव पैरादान करने पहुंच रहें हैं।

मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के सभी 33 जिलों में पैरादान हुआ है, जिसकी दिसम्बर और जनवरी महीने में कुल मात्रा 13 लाख 89 हजार 374 क्विंटल है। इसमें रायपुर जिला प्रथम स्थान जहां 1 लाख 88 हजार 656 क्विंटल, दूसरे स्थान पर जिला जांजगीर-चांपा 1 लाख 41 हजार 809, तीसरा स्थान पर जिला-धमतरी 1 लाख 21 हजार 766 क्विंटल, चौथे स्थान पर जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ जहां 1 लाख 4हजार 607 क्विंटल और पांचवा स्थान पर मुंगेली जिला है जहां 80 हजार 01 क्विंटल पैरादान हुआ है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री के मंशानुरूप जिला प्रशासन जांजगीर-चांपा द्वारा जिले में पैरादान के लिए किसानों को लगातार प्रेरित किया गया जिससे जिले के किसान स्वस्फूर्त आगे आकर सतत रूप से पैरादान कर रहे हैं, जिस कारण जांजगीर-चांपा में रिकॉर्ड पैरादान हुआ। कलेक्टर जांजगीर चांपा के निर्देश पर जिले में पैरादान को अभियान के रूप में लेते हुए प्रथम चरण में 10 से 15 दिसम्बर तक और दूसरे चरण में 26 से 30 दिसम्बर तक पैरादान महोत्सव का आयोजन किया गया। परिणामस्वरूप जांजगीर-चापां के किसानों द्वारा 1 लाख 41 हजार 809 क्विंटल का पैरादान गोठानों में किया गया है।

जांजगीर-चांपा जिले में सुराजी गांव योजना के तहत बनाए गए गोठानों में गायों के लिए साल भर के लिए पैरा की कमी न हो और पैरा एकत्रित हो सके इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा किसानों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही किसानों को पैरा नहीं जलाने को लेकर सतत रूप से जागरूक किया जा रहा है।

रायपुर जिलें में फसल कटाई के पश्चात खेतों में पड़े हुए पैरे एकत्रित करने के लिए शासन द्वारा बेलर मशीन की व्यवस्था की गई है। बेलर मशीन से एकत्रित पैरे का उपयोग गौठानों में पशुओं के लिए निःशुल्क चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। रायपुर जिलें में भी जिला प्रशासन द्वारा किसानों से पैरादान करने की अपील करते हुए कहा है कि किसान अधिक से अधिक संख्या में फसल अवशेष प्रबंधन करें जिससे मुख्यमंत्री की मंशानुरूप निकटतम गौठानों में, पैरादान के माध्यम से पशुचारा उपलब्ध हो सके।

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