मध्य प्रदेश

एमपी के सीएम शिवराज बोले- प्रदेश में समान नागरिक संहिता होगी लागू, कहा- इस कानून के तहत एक व्यक्ति एक ही शादी कर सकेगा

सीएम की इस घोषणा के बाद प्रदेश में सियासत गरमाई, कांग्रेस ने इसे चुनावी प्रोपेगंडा बताया

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समान नागरिक संहिता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश में समान नागरिक संहिता लागू होना चाहिए। मप्र में इसके लिए कमेटी बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज गुरुवार को बड़वानी के सेंधवा में चाचरिया गांव में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। सीएम के इस बयान के बाद प्रदेश में सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस ने इसे चुनावी प्रोपेगेंडा करार देते हुए कहा है कि भाजपा इसे चुनाव तक याद रखेगी, चुनाव बाद भूल जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासियों के बीच जन जागरुकता सम्मेलन में पहुंचे थे। वे साफा और आदिवासियों की जैकेट पहने हुए नजर आए। सम्मेलन में उन्होंने पेसा एक्ट के बारे में समझाया।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिवराज ने कहा कि कई बार बड़े खेल हो जाते हैं। खुद जमीन नहीं ले सकते तो किसी आदिवासी के नाम से जमीन ले ली। कई बदमाश ऐसे भी आ गए, जो आदिवासी बेटी से शादी करके जमीन उसके नाम से ले लेते हैं। कई तो सरपंची का चुनाव लड़वा देते हैं। शादी कर ली तुम सरपंच बन जाओ और मैं पैसा खा जाऊं। अब मामा ऐसे लोगों को लटकाएगा, छोड़ेगा नहीं। आज मैं जागरण की अलख जगाने आया हूं। बेटी से शादी की और जमीन ले ली। मैं तो इस बात का पक्षधर हूं, “कि भारत में अब समय आ गया है एक समान नागरिक संहिता लागू होनी चाहिए। एक से ज्यादा शादी क्यों करे कोई? एक देश में दो विधान क्यों चलें, एक ही होना चाहिए। मध्य प्रदेश में भी मैं कमेटी बना रहा हूं। समान नागरिक संहिता एक पत्नी रखने का अधिकार है, तो सबकी एक ही पत्नी होनी चाहिए।

सीएम ने फिर दिखाए सख्त तेवर: मंच पर ही कर दिया जनपद सीईओ को निलंबित

सम्मेलन के दौरान सरकारी योजनाओं में लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर सीएम शिवराज के सख्त तेवर एकबार फिर यहां भी दिखे। यहां उन्होंने मंच से सीईओ को सस्पेंड कर दिया। उन्होंने कहा कि- सीईओ लापरवाह है। दरअसल, सीएम को सेंधवा जनपद पंचायत के सीईओ राजेंद्र दीक्षित के खिलाफ पीएम आवास योजना को लेकर शिकायतें मिली थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए सीएम ने उन्हें मंच पर ही निलंबित कर दिया। सीईओ राजेंद्र दीक्षित ने 5 महीने पहले ही चार्ज लिया था। सीएम का ये सख्त रूप बड़वानी जिले के लोगों ने पहली बार देखा। इससे पहले दो माह पूर्व पड़ोसी जिले झाबुआ में कलेक्टर और एसपी पर सीएम कार्रवाई कर चुके थे।

मुख्यमंत्री की यह घोषणा सिर्फ चुनावी – कांग्रेस

इधर, समान आचार संहिता को लेकर सीएम के बयान के बाद प्रदेश में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये चुनावी घोषणा है। कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष अब्बास हफीज ने कहा- भाजपा के पास उपलब्धियों के नाम पर बताने के लिए कुछ नहीं हैं। इनका रिपोर्ट कार्ड जीरो है। मप्र में अब आगे चुनावी साल है। इसलिए मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों की तरफ से इस तरह के बयान दिए जा रहे हैं, ताकि ध्रुवीकरण का माहौल बने। कांग्रेस पार्टी शुरुआत से ही महिला और पुरुषों को समान अधिकार देने की पक्षधर रही है। दूसरी बात यूनिफार्म सिविल कोड की कमेटी की जो रिपोर्ट आती है, उसकी चर्चा लोकसभा और विधानसभा में होगी। उसके बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं। लेकिन, भाजपा को चर्चा नहीं करनी। उनको सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ये घोषणा करनी है और चुनाव बाद इसे भूल जाना है।

ये कोई नई बात नहीं, सालों से कही जा रही बात- विवेक तंखा

वहीं, इस मुद्दे पर कांग्रेस से राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने कहा है कि ये कोई नई बात नहीं है। यह स्टेट की ड्यूटी होनी चाहिए. इसमें कोई दो राय नहीं है। विवेक तन्खा ने कहा कि यह बात आज से नहीं सालों से चल रही है कि सिविल कोर्ट को किस तरीके से कमेंट किया जाए। सीआरपीसी कॉमन है, सीपीसी कॉमन है। क्रिमिनल कोर्ट कामन है। ऐसा नहीं है कि कम्युनलिटी के तरफ कोई काम नहीं हुआ है। यह काम बहुत पहले से हो चुका है। अब कुछ छुटे से रह गए हैं। जैसे मैरिज के हैं, डिवोर्स के हैं, एडॉप्शन के हैं और मेट्रोमोनी के हैं। यह कुछ एरिया है, जो अलग-अलग रिलीजन के अलग-अलग कोड हैं।

विवेक तंखा बोले- सीएम को जानकारी नहीं

श्री तंखा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भी मैटर गया तो डिस्पोज ऑफ इसलिए किया कि हम यह नहीं कर सकते यह केवल पार्लियामेंट कर सकता है और यह भी शेयर किया गया कि पार्लियामेंट कर सकता है, स्टेट नहीं कर सकता। यह ऑल इंडिया सब्जेक्ट है। उन्होंने कहा कि जब पार्लियामेंट में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का रिप्लाई आ चुका है। जब सुप्रीम कोर्ट के सामने गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का हलफनामा जा चुका है कि हम लॉ कमीशन के रिपोर्ट के आधार पर करेंगे और लॉ कमीशन ने भी एक प्रिलिमनरी रिपोर्ट दे दी है। इसमें शायद हमारे मुख्यमंत्री जी को इन सभी चीजों के बारे में जानकारी नहीं होगी। अगर वह महाधिवक्ता से बात करेंगे या अटॉर्नी जनरल से बात करेंगे तो उनको जानकारी मिल जाएगी। यह केवल पार्लियामेंट कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा है कि हम पार्लियामेंट के ही थ्रू करेंगे।

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