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ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदबा खत्म! फेरबदल में हट सकते हैं समर्थक मंत्री, छिन सकती है कई मंत्रियों की कुर्सी, करीब एक दर्जन नए चेहरे होंगे शामिल ….

भोपाल (कैलाश गौर)। मध्यप्रदेश में अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी कई बड़े निर्णय ले रही है। कयास लग रहे हैं कि गुजरात चुनाव के बाद मध्यप्रदेश पर पार्टी का फोकस होगा। इसी के चलते पार्टी शिवराज मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल करने जा रही है। इसके लिए भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से भी हरी झंडी मिल गई है। मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल नवंबर माह में ही संभावित था, लेकिन इसे गुजरात चुनाव तक रोक दिया गया है। गुजरात चुनाव के 8 दिसंबर को नतीजे आ जाएंगे। इसके बाद मप्र में विधानसभा का शीतकालीन सत्र होगा। इसी के बाद यह बदलाव होगा।

वर्तमान में चार जगह खाली हैं शिवराज कैबिनेट में

मध्यप्रदेश विधानसभा में 230 सदस्य हैं और इस हिसाब से इसका 15 प्रतिशत यानी अधिकतम 35 मंत्री शिवराज कैबिनेट में हो सकते हैं। जबकि इस समय मुख्यमंत्री को मिलाकर 31 सदस्य ही कैबिनेट में हैं। ऐसे में चुनाव से पहले जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण साधने के लिए चार मंत्रियों के रिक्त पद भरने और मंत्रियों के विभाग में फेरबदल की बात की जा रही है। बताया जाता है कि शिवराज को केंद्रीय नेतृत्व से भी मंत्रिमंडल में फेरबदल की अनुमति मिल गई है। कैबिनेट विस्तार में रिक्त पड़े 4 पद तो भरे ही जाएंगे, कुछ नॉन परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। कुछ मंत्रियों की शिकायतें भी हैं। इस तरह कुल मिलाकर 7-8 मंत्री बदलने के साथ ही लगभग एक दर्जन नए चेहरों को मंत्रिमंडल में मौका दिया जाएगा।

इस तरह है वर्तमान कैबिनेट

शिवराज कैबिनेट में इस समय 10 मंत्री क्षत्रिय हैं। महेंद्र सिंह सिसोदिया, गोविंद सिंह राजपूत, अरविंद सिंह भदौरिया, प्रद्युम्न सिंह तोमर, राजवर्धन सिंह दत्तीगांव, यशोधरा राजे सिंधिया, बृजेंद्र प्रताप सिंह, ऊषा ठाकुर, इंदर सिंह परमार और ओपीएस भदौरिया। वहीं, कैबिनेट में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मिलाकर 8 सदस्य भूपेंद्र सिंह, कमल पटेल, मोहन यादव, भारत सिंह कुशवाह, रामकिशोर कांवरे, बृजेंद्र सिंह यादव और सुरेश धाकड़ पिछड़े वर्ग से हैं। इसके अलावा तीन एससी और चार एसटी सदस्य हैं। एससी में जगदीश देवड़ा, तुलसी सिलावट और प्रभुराम चौधरी, जबकि एसटी में विजय शाह, बिसाहूलाल सिंह, मीना सिंह और प्रेम सिंह हैं।

सोशल इंजीनियरिंग को ध्यान में रखकर होगा फेरबदल

शिवराज सिंह चौहान चुनावी साल में अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रहे हैं। यह विस्तार सोशल इंजीनियरिंग को ध्यान में रखकर किया जाएगा। अभी सरकार का फोकस आदिवासी वोटों को साधने पर है। साथ ही मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय असंतुलन को भी ठीक करना है। शिवराज सिंह कैबिनेट में ब्राह्मण कोटे से अभी केवल दो मंत्री नरोत्तम मिश्रा और गोपाल भार्गव हैं। ऐसे में विंध्य-महाकौशल में क्षेत्रीय समीकरण साधने के लिए रीवा से राजेंद्र शुक्ल व शरदेंदु तिवारी, कटनी से संजय पाठक और भोपाल से रामेश्वर शर्मा को मौका दे सकती है। इसके अलावा शिवराज सिंह पूर्व मंत्रियों को भी शामिल कर उनकी नाराजगी दूर करने की रणनीति पर भी काम कर सकते हैं। वहीं, एससी से भोपाल के विष्णु खत्री, गुना के जजपाल सिंह जज्जी और जतारा से हरीशंकर खटीक को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। सोशल इंजीनियरिंग के चलते सरकार जोबट में कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुई सुलोचना रावत (एसटी) और हाटपिपलिया विधायक मनोज चौधरी (ओबीसी) के अलावा इंदौर-5 से महेंद्र हार्डिया (ओबीसी) को भी मौका दे सकती है। जबकि अनारक्षित कोटे से रतलाम विधायक चेतन कश्यप का नाम भी जोरशोर से चल रहा है।

सिंधिया गुट के आधा दर्जन मंत्री हैं सत्ता और संगठन की नजर में

सूत्रों का दावा है कि नए मंत्रिमंडल में सिर्फ उन मंत्रियों की ही जिम्मेदारी कायम रखी जाएगी, जो अब तक परफॉर्म करते आए हैं। नॉन-परफॉर्मिंग मंत्रियों का मंत्री पद छीना जाना तय माना जा रहा है। इनमें ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए विधायक भी शामिल हैं। शिवराज कैबिनेट में अभी सिंधिया कोटे से 6 कैबिनेट और 3 राज्यमंत्री हैं।  इनमें से आधा दर्जन मंत्रियों पर सत्ता और संगठन दोनों की नजर है। इसमें बुंदेलखंड के दो तथा मालवा-निमाड़, ग्वालियर संभाग, मध्यभारत और विंध्य से ए-एक मंत्री शामिल हैं, जिन्हें कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है। चर्चा है कि बीजेपी कोर कमेटी के पास कुछ मंत्रियों की शिकायतें भी पहुंची है। आगामी चुनाव को देखते हुए बीजेपी विपक्ष को किसी प्रकार का कोई मुद्दा नहीं देना चाहती। कुछ सिंधिया समर्थक मंत्रियों का परफॉर्मेंस भी ठीक नहीं है। उन्हें हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। इसका मतलब यह होगा कि सिंधिया और उनके समर्थकों का पार्टी में सत्ता में लाने का काम पूरा हो चुका है और अब भाजपा अपने स्तर पर अगले चुनावों की तैयारी कर सकती है। अगर यह सच निकला तो सिंधिया की पार्टी और सरकार में ताकत कम हो जाएगी।

25-26 नवंबर को सीएम करेंगे मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 25 और 26 नवंबर को मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करेंगे। इसमें राज्य और केंद्र की योजनाओं की स्थिति भी देखी जाएगी। शिवराज का मंत्रियों के साथ मंथन प्रशासन अकादमी में होगा। इसके लिए विभाग प्रमुखों को रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। इस तरह शिवराज को फिर से पावरफुल बनाने की तैयारी है। यानी अगला चुनाव भी शिवराज के नेतृत्व में लड़ा जा सकता है। इससे उन अटकलों पर भी विराम लगेगा, जो अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में भी मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने की ओर इशारा करती हैं।

बीजेपी के जिला संगठन में भी जल्द होगा बदलाव

आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा संगठन में भी कसावट ला रही है। इसके लिए पार्टी ने प्रदेश के सभी जिलाध्यक्षों का फीडबैक लिया है। कोर कमेटी को अधिकांश जिलों से फीडबैक मिल चुका है। बताया जाता है इसमें करीब 8 जिलाध्यक्षों को लेकर रिपोर्ट ठीक नहीं है। संगठन द्वारा फीडबैक के आधार पर इन जिलाध्यक्षों को बदला जा सकता है।

अपने क्षेत्र में रुके विकास कार्यों को पूरा कराने सक्रिय हुए ‘माननीय’

प्रदेश में विधानसभा चुनाव को महज 12 माह बचे हैं। ऐसे में विधायकों की चिंताएं अपने क्षेत्र के विकास को लेकर बढ़ गईं हैं। विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही विधायकों को अपने क्षेत्र में विकास की चिंता सताने लगी है। ऐसे में हर विधायक कोशिश कर रहा है कि उनके क्षेत्र में लंबित पड़ी विकास परियोजनाओं एवं कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। सड़क, बिजली और पानी की समस्या के साथ ही इन ‘माननीय’ विधायकों का सबसे अधिक फोकस सिंचाई परियोजनाओं पर है। दरअसल, प्रदेश की अधिकांश आबादी गांवों में रहती है और ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए मतदाताओं पर असर डालने के लिए विधायकों का भी पूरा फोकस सिंचाई परियोजनाओं पर है। विधायक समय पर काम नहीं होने से अफसरों पर ठेकेदारों के साथ सांठगांठ के आरोप भी लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जिन वादों से चुनाव जीता है, अगर उन्हें पूरा नहीं किया तो जनता के सामने नहीं जा सकेंगे।

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