छत्तीसगढ़बिलासपुर

48 घंटे बाद भी नहीं ले गए शव: अस्पताल में हंगामा, परिजन बोले- पहले कांस्टेबल रूपलाल चंद्रा को जेल भेजो, पुलिस प्रताड़ना से सुसाइड का आरोप …

बिलासपुर। सिपाही की पिटाई से दुखी होकर युवक के आत्महत्या करने का मामला अब तक शांत नहीं हुआ है। बुधवार को डॉक्टरों की टीम से शव का जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया। साथ ही सिपाही को सस्पेंड भी कर दिया गया है। फिर भी परिजनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उन्होंने जिला अस्पताल में जमकर हंगामा मचाया और शव लेकर जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक आरक्षक के खिलाफ FIR नहीं होगी और उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, तब तक हम शव लेकर नहीं जाएंगे। पूरा मामला बिल्हा थाना क्षेत्र का है।

युवक के सुसाइड के इस केस में पुलिस की मुश्किलें कम नहीं हो रही है। मंगलवार की पूरी रात परिजन और ग्रामीण थाने के बाहर डटे रहे। धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी कर रात भर लोगों ने हल्ला मचाया। आरक्षक रूपलाल चंद्रा को लाइन अटैच करने के बाद भी परिजनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। आखिरकार, बुधवार को SSP पारुल माथुर के निर्देश पर परिजनों को शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी कराया गया और आरक्षक रूपलाल चंद्रा को सस्पेंशन आदेश जारी किया गया। इसके बाद पुलिस के साथ परिजन शव लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों की टीम ने शव का पोस्टमार्टम किया। दोपहर में पोस्टमार्टम होने के बाद परिजन शव को लेकर जाने से इंकार कर दिया और जिला अस्पताल में हंगामा मचाने लगे।

युवक हरीशचंद्र के सुसाइड केस बीते सोमवार की रात का है। परिजन और ग्रामीण मंगलवार सुबह से हंगामा मचाकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान जिम्मेदार अफसर उन्हें समझाने में नाकाम रहे। इसका फायदा आम आदमी पार्टी ने उठाया और ग्रामीणों के साथ धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इतना सब कुछ हुआ, फिर भी पुलिस अफसर तमाशबिन बने रहे। आखिरकार, देर शाम आरक्षक को लाइन अटैच कराया गया। फिर भी मामला शांत नहीं हुआ। कहा जा रहा है कि पुलिस अफसर शुरूआत से ही केस को गंभीरता से लेते तो यह नौबत ही नहीं आती। अब आरक्षक को सस्पेंड करने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है और पुलिस अफसरों ने जिम्मेदारी से हाथ खींच लिया और जिला अस्पताल से गायब हो गए।

बिलासपुर में इस तरह का पहला मामला है, जिसमें 48 घंटे बाद भी लाश मॉरच्यूरी में पड़ी है। इससे पहले जितनी भी घटनाएं हुई, पुलिस अफसरों ने पहले शव उठवाने और अंत्येष्टि कराने में गंभीरता दिखाई। लेकिन, इस केस में थानेदार और पुलिस अफसरों ने चूक कर दी, जिससे यह मामला उलझता जा रहा है।

इस पूरे मामले में परिजन और समाज के लोगों को पुलिस अफसर समझाते रहे। लेकिन, परिजन कुछ समझने के लिए तैयार ही नहीं है। अफसरों ने उन्हें बताया कि केस की जांच शुरू हो गई है। उनका बयान भी ले लिया गया है। जांच रिपोर्ट आने से पहले आरक्षक को सस्पेंड भी कर दिया गया है। लेकिन, फिर भी परिजन अड़े हुए हैं। मृतक युवक के पिता भागीरथी ने कहा कि जब तक आरक्षक के खिलाफ एफआईआर नहीं होगी और उसकी गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक हम शव लेकर नहीं जाएंगे।

ग्राम भैसबोड़ निवासी हरीशचंद्र गेंदले (23) की बाइक सोमवार की सुबह छात्रा से टकरा गई थी, जिससे विवाद की स्थिति बन गई। छात्रा की शिकायत पर पुलिस गांव पहुंच गई। इस दौरान हरीशचंद्र नहीं मिला, तब पुलिस उसके पिता भागीरथी गेंदले को पकड़ कर ले आई। आरोप है कि इस दौरान ग्रामीणों के सामने आरक्षक ने उसकी पिटाई की। फिर थाने लाकर मारपीट किया। इधर, पिता को पुलिस के पकड़कर ले जाने की जानकारी मिलते ही हरीशचंद्र भी थाने पहुंच गया।

आरोप यह भी है कि आरक्षक रूपलाल चंद्रा ने पिता-पुत्र को दिन भर थाने में बिठाए रखा और प्रताड़ित करता रहा। फिर शाम को उन्हें छोड़ दिया गया। पिता के साथ हुई मारपीट की इस घटना के बाद दुखी होकर हरीशचंद्र ने ट्रेन के सामने कूद कर अपनी जान दे दी। घटना से आक्रोशित होकर मंगलवार की सुबह से परिजनों के साथ ही समाज के लोगों ने थाने का घेराव कर दिया।

 

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