मध्य प्रदेश

पश्चिमी मप्र के आदिवासी अंचल में जल जीवन मिशन के कार्यों को देखने केंद्र से आया दो सदस्यीय दल

16 गांवों में जाकर योजना के संचालन में आ रही व्यवहारिक दिक्कतों और हकीकतों को जानेगा जांच दल

झाबुआ। पश्चिमी मप्र के आदिवासी अंचल में चले रहे जल जीवन मिशन के कार्यों को देखने के लिए केंद्र से दो सदस्यीय दल झाबुआ पहुंचा। इस दल में निर्मल चित्तौड़ा और डॉ. संजीव अग्रवाल शामिल हैं। यह दल अंचल के 16 गांवों में जाकर योजना की स्थिति देखेंगे। साथ ही ग्रामीणों और अधिकारियों से चर्चा कर योजना संचालन में आ रही व्यवहारिक दिक्कतों से रूबरू होगा। सुबह दल के सदस्य पेटलावद और थांदला विकासखंड के गांवों में पहुंचे। उनके साथ पीएचई ईई जितेंद्र कुमार मावी और अन्य अधिकारी मौजूद थे।

योजना का निर्माण ही काफी नहीं, लंबे समय तक चलाना जरूरी

केंद्रीय दल के सदस्य निर्मल चित्तौड़ा ने बताया कि योजना का निर्माण ही काफी नहीं है, उसे आगे लंबे समय तक चलाना बहुत आवश्यक है। इसके लिए जरूरी है कि ग्राम पंचायत और ग्रामीण जल एवं स्वच्छता समिति है, उन्हें प्रेरित किया जाए। योजना संचालन के तौर तरीके बदले जाए और कुशलता बढ़ाई जाए। इसके लिए भारत सरकार और मप्र सरकार के द्वारा कई प्रशिक्षण भी आयोजित किए गए हैं,जिससे वो इस काम को समझ सके और आगे बढ़ सके। चित्तौड़ा के अनुसार भारत सरकार के 15वें वित्त आयोग में 60 प्रतिशत राशि जल एवं स्वच्छता के लिए रखी है, उसका उपयोग योजना संचालन के लिए किया जा सकता है। केंद्रीय दल ने योजना संचालन में ग्रामीणों की भागीदारी को सबसे अहम बताया।

अधिकारियों को योजना की हकीकत से कराया रूबरू

जिन तीन गांवों में दल सबसे पहले पहुंचा, उनमें रतम्बा, घोड़ाथल और कचराखदान शामिल है। इन गांवों में अधिकारियों ने देखा कि किस तरह से हर घर को नल और जल से जोड़ा जा रहा है। उनकी क्या व्यवस्थाएं हैं। पानी की गुणवत्ता कैसी है। साथ में स्थायित्व क्या है। लोगों से चर्चा कर जाना कि क्या ये योजनाएं लंबे समय तक चल पाएगी और पंचायती राज इन्हें आगे किस तरह से चलाने में सक्षम रहेगा। दल के सदस्यों को पीएचई ईई जितेंद्र कुमार मावी ने व्यावहारिक दिक्कतों से भी अवगत कराया।

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