
दिल्ली बनेगी रणनीति का केंद्र : AI की वैश्विक दौड़ में भारत की दावेदारी
भारत केंद्रित एआई वेंचर कैपिटल फंड अब घरेलू स्टार्टअप पर बड़े दांव लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे सरकारी समर्थन को पूरक बनाया जा सके। वेंचर इंटेलिजेंस के आंकड़े दिखाते हैं कि 2025 में ऐसे 16 फंड ने 1.87 अरब डॉलर जुटाए, जो पिछले वर्ष के 35.8 करोड़ डॉलर से तेजी से बढ़ा। इनमें लाइटस्पीड, नेक्सस और एक्सेल जैसे खिलाड़ी शामिल थे। फिर भी चुनौतियां बनी हुई हैं। भारत के पास अभी भी ऐसे घरेलू एआई कंपनियां नहीं हैं जिन्होंने सार्थक पैमाना हासिल किया हो। जैसे कि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व। यह एक मूलभूत प्रश्न उठाता है। क्या भारतीय एआई स्टार्टअप अपने उत्पादों के लिए खरीदार पाएंगे, या उद्यम वैश्विक टेक कंपनियों पर निर्भर रहेंगे?
इंडिया इम्पैक्ट समिट के लिए दुनिया भर के 100 से अधिक देशों के आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) क्षेत्र के दिग्गज दिल्ली में एकत्रित होंगे। इनमें कई शीर्ष कंपनियों के मुख्य कार्याधिकारियों, राष्ट्र प्रमुखों के साथ 35,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह करेंगे।
उम्मीद की जा रही है कि दो दिवसीय आयोजन में 70 से 100 अरब डॉलर का निवेश घोषित हो सकता है। भले ही अमेरिका और चीन एआई के क्षेत्र में बढ़त के लिए संघर्ष कर रहे हैं और मिलकर एआई वैल्यू चेन में वैश्विक निवेश का 65 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हों, भारत स्वयं को इस वैश्विक दौड़ में एक वैकल्पिक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है।
भारत उस मंच पर जगह चाहता है जहां एआई के भविष्य का एजेंडा तय किया जाएगा। सरकार की एआई रणनीति को स्पष्ट करते हुए इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘संप्रभु एआई भारत का राष्ट्रीय लक्ष्य है। हमारे देश के आकार को देखते हुए हमें एआई क्षेत्र के सभी पांच स्तरों पर प्रतिस्पर्धी बनना होगा। वे हैं ऐप्लीकेशंस, मॉडल, चिपसेट, अधोसंरचना और ऊर्जा।’ भारत को इन क्षेत्रों में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात आदि सभी अपनी खुद की एआई क्षमताएं विकसित करने की दौड़ में हैं। फिर भी कई कारक भारत के पक्ष में हैं। भारत दुनिया के सबसे बड़े एआई उपभोक्ताओं में से एक है। यह वैश्विक कारोबारियों के लिए एक प्राथमिकता वाला बाजार भी है।
चैटजीपीटी ने भारत को अमेरिका के बाद अपने डाउनलोड के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा बाजार बताया है। रिपोर्टों के अनुसार, परप्लेक्सी ने भारत को 2025 में अपना सबसे तेजी से बढ़ते और सबसे बड़े बाजार के रूप में दर्शाया है। एंथ्रोपिक के लिए, भारत अमेरिका के बाद क्लॉड उपयोग का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। अमेरिका स्थित इलेवन लैब्स जो एआई जनित आवाज और ऑडियो टूल में अग्रणी है, भारत को अपने कुल साइन अप के लिहाज से सबसे बड़ा और एंटरप्राइज राजस्व के लिहाज से दूसरा सबसे बड़ा बाजार मानता है। सेंसरटॉवर के आंकड़े दर्शाते हैं कि 2025 में भारत ने दुनिया के 3.8 अरब जनरेटिव एआई ऐप डाउनलोड में से 16 प्रतिशत का योगदान दिया। यह विश्व स्तर पर शीर्ष पर रहा। विश्व आर्थिक मंच में प्रस्तुत बेन एंड कंपनी का विश्लेषण भारत को एआई अपनाने में अग्रणी बताता है। लगभग 86 प्रतिशत कंपनियां एआई का उपयोग कर रही हैं या इसकी खोज कर रही हैं, जबकि 14 प्रतिशत जनसंख्या सक्रिय रूप से एआई उपकरणों का उपयोग करती है।
इसके अलावा चिंता यह भी है कि भारत की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवा कंपनियां, जो लंबे समय से श्रम लागत अंतर पर निर्भर रही हैं, एआई में निवेश करने में धीमी रही हैं और जमीन खोने का जोखिम उठा रही हैं। यही आलोचना कई बड़े भारतीय समूहों पर भी लागू होती है, जिन्होंने घोषणाएं तो की हैं लेकिन निर्णायक निवेश बहुत कम किए हैं।
बुनियादी ढांचा भी एक बाधा है। भारत की डेटा सेंटर क्षमता जो एआई को आगे बढ़ाने के लिए महत्त्वपूर्ण है, वह वैश्विक क्षमता का केवल 3 प्रतिशत है। 2010 से 2024 के बीच, भारत का कुल एआई निवेश उसकी 2024 की जीडीपी का केवल 1.2-1.8 प्रतिशत रहा, जिससे यह बेन के विश्लेषण में शामिल 11 देशों में नौवें स्थान पर रहा- कनाडा, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया और स्वाभाविक रूप से चीन व अमेरिका से पीछे। हालांकि 2025 में एआई केंद्रित वीसी निवेश बढ़कर 92.8 करोड़ डॉलर हो गया। फिर भी यह उन स्टार्टअप के लिए अपर्याप्त है जो बड़े पैमाने पर काम करना चाहते हैं। इसके बावजूद, सरकार का मानना है कि उसके पास भारत की क्षमताओं पर आधारित व्यावहारिक रणनीति है। वैष्णव का तर्क है कि वैश्विक कार्यभार का 95 प्रतिशत छोटे एआई मॉडलों द्वारा संभाला जा सकता है, जिन्हें बनाना सस्ता है।
भारत के पास एक बड़ा आईटी सेवा क्षेत्र है। उसके पास इस बात का ज्ञान है कि वैश्विक कंपनियां कैसे काम करती हैं। ये कंपनियां एआई के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रही हैं। पिछले वर्ष उन्होंने एआई के क्षेत्र में 33 फीसदी लोगों को भर्ती किया।















