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जहां हर चीज सत्ता और स्वार्थ है …

मज़हब ने इंसानियत खत्म कर दी। मैंने सुना है उत्तर-पूर्व दिशा के घर और लोग भोल होते हैं। पर उत्तर-पूर्व दिल्ली ने इसे खोखला कर दिया। क्या मजहब के नाम पर किसी की नृशंस हत्या, लोकतंत्र के नाम पर कलंक और राक्षस तंत्र की स्थापना का दुर्योग नहीं माना जाए। जहां हर चीज सत्ता और स्वार्थ है।

सशक्त ? केंद्र सरकार और गृहमंत्री, लोकप्रिय ? एवं निर्वाचित मुख्यमंत्री, कथित शिक्षा प्रेरक उप मुख्यमंत्री, सौ साल पुरानी पार्टी, न्यायालय और सबसे बढ़कर बुद्धि परजीवी सब नंगे हो चुके हैं। आज अंकित कल कोई और ? पाकिस्तान भी एक दिन में नहीं बंटा इस हेतु कई जिम्मेदार थे।

ऐसे में आप और हम को सोशल मीडिया और मीडिया पर परोसे जा रहे ज़हर से अलग आपसी प्रेम की मजबूत दीवार बनानी होगी। जिन पर इन नापाक नोनियों को झाड़ने की कूव्वत रखने की क्षमता हो।

©डॉ साकेत सहाय, नई दिल्ली

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