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सदियों का इंतजार …

{भाग 1}

 

आशा पढ़ाई में होशियार, और ऊपर से बला की खूबसूरत, मोहल्ले में सबकी चहेती। 12 वीं में अच्छे अंकों से पास हुई, मेडिकल में दाखिला मिल गया, मन की मुराद पूरी हो गई। B.D.S. करना चाहती थी। चण्डीगढ़ कॉलेज में दाखिला हो गया। अम्बाला से चण्डीगढ़ अप-डाऊन करती थी। जैसे ही कॉलेज जाने लगी दिवानों की तो जैसे लाइन ही लग गई। कॉलेज में हर कोई उससे नज़दिकिया बनाने की कोशिश करता लेकिन वो किसी को घास तक नहीं डालती।

मोहल्ले में एक नए किराएदार आए थे, मां ने बताया उनका बेटा सुरेश भी उसी कॉलेज में पढ़ता है। जब देखा उसे तो पलकें ही झपकना भूल गई हो जैसे गेहुँआ रंग, नीली आंखें, माथे पर छोटी सी बालों की लट शर्मीला सा। जिस के लिए हज़ारों लड़के जान देने को तैयार रहते थे हर पल, आज किसी और के लिए उसकी जान पर बन आई है। क्लास में भी वो बस उसी को निहारा करती है।

सुरेश ज्यादा बात नहीं करता था बस अगर पढ़ाई के मुतालिक कोई बात हो तो बात कर लेता। आशा को हर पल इन्तज़ार रहता कि शायद सुरेश उसके मन की बात जान ले, पढ़ाई पूरी हो गई प्लेसमैंट हो गई थी दोनों की। दोनों को अलग-अलग शहर में जॉब मिल गई थी। आज फेयरवैल था। दोनों बहुत खूबसूरत लग रहे थे सुरेश मिस्टर इव और आशा मिस इव चुनी गईं। कुछ दोस्त उनसे हंसी ठिठोली कर रहे थे कि दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं लेकिन सुरेश अब भी चुप था, पार्टी के बाद वापस आकर अगले दिन दोनों अपनी-अपनी जॉब के लिए जाने को तैयार। आशा सुरेश के घर बाए बोलने जाती है।

सोचती है शायद अब सुरेश जान ले उसके मन की बात, शायद सुरेश भी उसे चाहता हो और इकरार कर ले लेकिन उसे निराशा ही हाथ लगती है, बेमन से वापस आकर चली जाती है जॉब पर। दो साल तक किसी की कोई खबर नहीं।

मां से पता चलता है कि सुरेश के जाते ही उसके पापा का भी तबादला हो गया तो वो लोग भी चले गए यहां से। दो साल बाद आशा के माता-पिता आशा की शादी तय कर देते हैं, चुपचाप शादी के लिए राज़ी लेकिन मन के किसी कोने में इन्तज़ार अभी भी सुरेश का है। शायद कहीं से आ जाए और पढ़ ले उसके मन की बात लेकिन शायद कुदरत को मंजूर नहीं। आशा दुल्हन बनी है। डोली सजी है।

बारात आई, जैसे ही आशा जयमाला डालने लगती है, दूल्हे के साथ दोस्तों में सुरेश को खड़ा देख हत्प्रभ रह जाती है। दोनों एक टक एक-दूसरे को अपलक देखते रहते हैं। आशा को लगता है कि अब सुरेश ज़रूर जान लेगा उसके मन की बात और कह देगा अपने भी मन की बात। इन्तज़ार है अभी भी आशा को, क्या कह पाएगा सुरेश …क्या आशा का सदियों का इन्तज़ार खत्म हो पाएगा …..

क्रमशः …

©प्रेम बजाज, यमुनानगर

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