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बेमौसम बरसात ने किसानों की उम्मीदों पर फेरा पानी, धान खराब – कटी फसल को संभालना मुश्किल …

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में रविवार की रात और सोमवार की सुबह हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मध्यम से तेज बारिश ने किसानों की उम्मीदों की फसल को बर्बाद कर दिया है। खेतों में खड़ी फसल गिर गई है। धान की बालियां पानी में डूब गई हैं। खेतों में पानी भी भर गया है, जिससे हार्वेस्टर से भी अब कटाई संभव नहीं है। कटी फसल को संभालना भी अब मुश्किल हो गया है।

अचानक हुई इस बारिश ने किसानों के माथे पर बल पड़ गया है। सप्ताहभर पहले भी बारिश हुई थी, जिसमें धान सहित अन्य फसलों को नुकसान हुआ था। दक्षिण भारत में बने सिस्टम की वजह से राजधानी रायपुर, दुर्ग, कवर्धा, धमतरी, महासमुंद, बेमेतरा, कांकेर सहित कई जिलों में बारिश हुई है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ में इस खरीफ सीजन करीब 48 लाख 20 हजार हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बोआई का लक्ष्य था। इसमें धान का लक्ष्य 36.95 लाख हेक्टेयर था, लेकिन 2500 रुपये समर्थन मूल्य में धान की खरीदी होने की वजह से इस लक्ष्य को पीछे छोड़ते हुए करीब 38 लाख हेक्टेयर में किसानों ने धान की फसल लगाई गई है। प्रदेश में लगभग तीन लाख 42 हजार हेक्टेयर में दलहन, दो लाख हेक्टेयर में तिलहन, डेढ़ लाख हेक्टेयर में साग-सब्जी और अन्य फसलों की बोआई की गई है।

मौसम में आए बदलाव और मध्यम से भारी बारिश ने किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक निम्न दबाव का क्षेत्र अभी दक्षिण-पूर्व अरब सागर और पूर्वी-मध्य अरब सागर के ऊपर बना हुआ है। इसके प्रभाव से पिछले 24 घंटों के दौरान, छत्तीसगढ़ और तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हुई है। आने वाले एक-दो दिनों में प्रदेश के कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर एक दिसंबर से धान की खरीदी शुरू होनी है। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने अभी हाल ही में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक लेकर सभी कलेक्टरों को धान खरीदी के लिए सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं। किसान धान बेचने की तैयारियों में लगे थे कि रविवार व सोमवार की बारिश ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है।

कई किसानों ने धान को खलिहानों में सुखाया था, लेकिन बारिश से उनके धान भीग गए हैं, जिससे नुकसान तय है। गुणवत्ता प्रभावित होने से धान को खरीद केंद्रों से लौटा लौटा दिया जाएगा और  कोचियों के पास धान को बेचने पर नुकसान होगा।

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