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उमा भारती ने ब्यूरोक्रेट्स वाले विवादास्पद बयान पर दी सफाई, लेकिन, फिर खड़ा कर दिया नया विवाद…

भोपाल। ब्यूरोक्रेसी को लेकर दिए आपत्तिजनक बयान पर विवाद बढ़ने के बाद मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने शाम होते होते अपनी सफाई भी दे दी. लेकिन सफाई भी ऐसी आई कि फिर एक विवाद को ले आई. उमा भारती ने अपने बयान पर खेद जताया, लेकिन इस माफीनामे में उन्होंने नेताओं पर टिप्पणी कर दी.

 

बीजेपी नेता और पूर्व सीएम उमा भारती ने अपने बयान में लिखा- परसों भोपाल में मेरे निवास पर पिछड़े वर्ग का एक प्रतिनिधिमंडल मुझे मिला. यह मुलाकात औपचारिक नहीं थी. उस पूरी बातचीत का वीडियो मीडिया में वायरल हुआ है. मैं मीडिया की आभारी हूं कि उन्होंने मेरा पूरा ही वीडियो दिखाया, क्योंकि मैं तो ब्यूरोक्रेसी के बचाव में ही बोल रही थी.

 

उमा ने दी ये सफाई

उमा भारती ने आगे लिखा-हम नेताओं में से कुछ सत्ता में बैठे निकम्मे नेता अपने निकम्मेपन से बचने के लिए ब्यूरोक्रेसी की आड़ ले लेते हैं कि हम तो बहुत अच्छे हैं, लेकिन ब्यूरोक्रेसी हमारे अच्छे काम नहीं होने देती. जबकि सच्चाई यह है कि ईमानदार ब्यूरोक्रेसी सत्ता में बैठे हुए मजबूत, सच्चे और नेक इरादे वाले नेता का साथ देती है. यही मेरा अनुभव है. मुझे रंज है कि मैंने असंयत भाषा का इस्तेमाल किया, जबकि मेरे भाव अच्छे थे. मैंने आज से यह सबक सीखा कि सीमित लोगों के बीच अनौपचारिक बातचीत में भी संयत भाषा का प्रयोग करना चाहिए.

 

क्या है मामला?

सोमवार को उमा भारती का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो ये कहते हुए सुनाई दे रही हैं कि ब्यूरोक्रेसी कुछ नहीं होती, हमारी चप्पल उठाने वाली होती है. ब्यूरोक्रेसी चप्पल उठाती है हमारी. हमको समझाया जाता है कि आपका बहुत बड़ा चक्कर पड़ जाएगा, ऐसा हो गया तो. क्या लगता है ब्यूरोक्रेसी नेता को घुमाती है. अकेले में बात हो जाती है, फिर ब्यूरोक्रेसी फाइल बनाकर लाती है. मैं 11 साल मंत्री, मुख्यमंत्री रही. पहले हमसे बात हो जाती है, फिर फाइल प्रोसेस होती है. ब्यूरोक्रेसी की औकात क्या है. हम उन्हें तनख्वाह दे रहे हैं, हम उन्हें पोस्टिंग दे रहे, हम प्रमोशन और डिमोशन दे रहे. हम ब्यूरोक्रेसी के बहाने से अपनी राजनीति साधते हैं.

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