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एकनाथ के बागी होते ही देवेंद्र से मिले थे उद्धव, भाजपा ने संधि से कर दिया इनकार …

मुंबई। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे के द्वारा बागी तेवर अपनाने के बाद देवेंद्र फडणवीस से संपर्क साथा था। उद्धव ठाकरे ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को फोन किया। हालांकि, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। जाहिर है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने 2019 में उद्धव तक पहुंचने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने किसी भी बातचीत को ठुकरा दिया था। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा, “उद्धव ठाकरे ने व्यक्तिगत रूप से फडणवीस से बात की और प्रस्ताव दिया कि भाजपा को उनसे सीधे तौर पर निपटना चाहिए ताकि एकनाथ शिंदे को समर्थन देने के बजाय पूरी पार्टी उनके साथ आ सके। हालांकि भाजपा नेता ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।” सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि यह बातचीत फडणवीस और ठाकरे के बीच आमने-सामने हुई थी।

यह सब तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम उद्धव ठाकरे को विधान परिषद चुनाव में क्रॉस वोटिंग का संदेह हुआ और उन्होंने शिवसेना के सभी विधायकों की तत्काल बैठक बुलाई। हालांकि शिवसेना नेता और मंत्री एकनाथ शिंदे तब तक 11 विधायकों के साथ लापता हो चुके थे। इसके बाद भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की और उन्हें राज्य विधानसभा में फ्लोर टेस्ट की मांग वाला एक पत्र सौंपा। भाजपा की अपील के बाद राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सरकार को 30 जून को राज्य विधानसभा में बहुमत साबित करने के निर्देश जारी किए।

इसके तुरंत बाद फडणवीस ने एकनाथ शिंदे को अगले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में घोषित किया, जबकि यह भी कहा कि वह राज्य सरकार का हिस्सा नहीं होंगे। भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने तब फडणवीस को शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा बनने का निर्देश दिया था।

भाजपा ने फैसला किया कि वे उद्धव को छोड़कर शिवसेना को चाहते हैं। उसके बाद हाल ही में उद्धव ठाकरे को मुर्मू का समर्थन करने के लिए पत्र लिखने वाले कुछ सांसदों से शिवसेना प्रमुख ने मध्यस्थता में सहायता करने का अनुरोध किया था। जब वे उद्धव से मिले तो उन्होंने उनसे कहा कि भाजपा तक पहुंचने की उनकी कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकला। यहां तक ​​कि सांसदों को भी भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

कहा जाता है कि शिवसेना के कुछ कार्यकर्ता एकनाथ शिंदे के पास भी पहुंच गए थे, जो रश्मि ठाकरे के संदेश को ले जाने का दावा कर रहे थे। लेकिन शिंदे ने समझौता करने से इनकार कर दिया था।

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