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गलवान संघर्ष के दो साल, अब तक दोनों देशों के बीच नहीं सुलझा सके बॉर्डर के मसले …

नई दिल्ली। 15 जून 2020 को भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इस झड़प से दोनों पक्षों को नुकसान पहुंचा और संबंधों में खटास आ गई। दोनों देशों के बीच संबंध बिगड़ते चले गए। झड़प के दो साल बीत जाने के बाद भी बॉर्डर पर तनाव बना हुआ है और सरकार अब तक कोई समझौते का रास्ता नहीं निकाल सकी है।

दो साल पहले हुए संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक और अज्ञात चीनी सैनिकों की मौत हो गई। चीन ने हताहत हुए सैनिकों की संख्या बताने से इनकार कर दिया था।  बाद में फरवरी 2021 में चीन ने गलवान संघर्ष में मारे गए चार सैनिकों को मरणोपरांत सम्मानित किया। रूस और ऑस्ट्रेलिया की न्यूज एजेंसियों ने बताया कि भारत के साथ हुए हिंसक झड़प में 38 चीनी सैनिकों की मौत हो गई थी।

चीन ने बॉर्डर क्षेत्र में सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है। पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने तिब्बत क्षेत्र में बॉर्डर के नजदीक कई अभ्यास किए हैं। उदाहरण के लिए चीन ने जून महीने के पहले सप्ताह में शिगात्से में अभ्यास किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी सेना ने एंटी टैंक रॉकेट लॉन्चर्स, ग्रेनेड लॉन्चर्स, एंटी एयरक्राफ्ट मशीन गन आदि से अभ्यास किया।

चीनी सरकारी मीडिया ने मई की शुरुआत में रिपोर्ट दी थी कि पश्चिमी सैन्य कमांड के शिनजियांग सैन्य जिले में पीपल्स लिबरेशन आर्मी की एक इकाई ने 5200 मीटर की ऊंचाई पर खूब सारे लॉन्ग-रेंज हेवी रॉकेट आर्टिलरी जमा किए हैं।

मई 2020 में गतिरोध शुरू होने के बाद से दोनों पक्षों ने अब तक 15 दौर की बातचीत की है। दोनों पक्षों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर की बातचीत भी हुई है लेकिन अभी तक किसी समझौते पर नहीं पहुंचा जा सका है। भारत के विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने चीन से साफ कहा है कि जब तक बॉर्डर पर हालात सामान्य नहीं हो जाते दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते हैं।

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