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कान्हा टाइगर रिजर्व में फिर हुआ बाघ का शिकार : बंद बोरे में मिला बाघ का शव, सिर और पैर गायब…

मंडला। राष्ट्रीय वन्यजीव अभयारण्य कान्हा में बहुतायात संख्या में बाघ पाये जाते है, जंगलों में बाघ की बहुतायत उनकी जान की दुश्मन भी बन गई है। संरक्षित वन्यप्राणी के शिकार से जुड़ा ताजा मामला कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर वन मंडल अंतर्गत परिक्षेत्र सिझौरा की बीट मोहाड़-2 के ग्राम मनोहरपुर में सामने आया है। यहां एक नाले पर बने स्टॉपडेम के पास कान्हा प्रबंधन की टीम ने प्लास्टिक के बंद बोरे में बाघ के शरीर के कुछ हिस्से जब्त किए हैं। इन अंगों को तेज औजार से काटकर अलग किया गया था। हालांकि, बाघ के बरामद अंगों में से सिर एवं पैर का हिस्सा गायब है।

प्रारंभिक रूप से कान्हा प्रबंधन की टीम ने इसे शिकार का मामला मानते हुए जांच शुरू की। टीम ने स्थल निरीक्षण में तथा अंगों की स्थिति देखते हुए शव करीब एक सप्ताह पुराना होना पाया। खोजी कुत्ते (डॉग स्क्वॉयड) एवं स्थानीय संपर्कों की सहायता से सुराग तलाशते हुए टीम ने ग्राम मनोहरपुर के तिंसाटोला से 3 संदिग्ध व्यक्तियों को पूछताछ के लिए पकड़ा। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपियों के नाम चेतू, कमल एवं मनीराम निवासी मनोहरपुर बताए गए हैं। सभी आरोपी बेगा जाति के हैं। पूछताछ में मुख्य अपराधी चेतू ने बताया कि 2 अक्टूबर की रात्रि फंदा डालकर सूअर फंसाने के लिए बिजली तार बांधकर करेंट प्रवाहित कर दिया था, जिसमें बाघ आकर फंस गया। इसके बाद तीनों ने बाघ के शरीर को कुल्हाड़ी से टुकड़े कर नाले में फेंक दिया। सिर एवं पैर को बाद में बेचने की नीयत से बचा कर अपने पास रख लिया। आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। इधर, बाघ के शव के जब्त अवशेषों को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली की प्रतिनिधि प्रिया वारेकर, कार्बेट फाउंडेशन एवं कान्हा टाइगर रिजर्व क्षेत्र संचालक एसके सिंह की उपस्थिति में पीएम पश्चात निर्धारित प्रोटोकाल अनुसार जला दिया गया।

 

कान्हा टाइगर रिजर्व में पिछले डेढ़ साल में 5 बाघों की मौत

उपलब्ध जानकारी के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में 1 अप्रैल 2020 से 11 अक्टूबर 2021 तक की डेढ़ साल की अवधि में ही 5 बाघों की मौत हो चुकी है। इनमें से 3 बाघों की मौत टेरिटोरियल फाइट के कारण हुई है। वहीं, 2 बाघों का शिकार किया गया है। कान्हा प्रबंधन का कहना है कि अभयारण्य में बाघों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिसकी वजह से उनमें टेरिटोरियल फाइट होती है। इसमें कमजोर बाघ घायल होकर या तो इलाका छोड़ देता है या मर जाता है। यह प्राकृतिक है। टेरिटोरियल फाइट रोकने के लिए सेंचुरी बनाकर नए इलाकों की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है।

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