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इस्लामी प्रोपेगैण्डा का सच …

(कल के अंक से आगे)

इधर भारतीयों ने भी बिडेन् के भारतीय मूल को उजागर कर दिया। स्वयं बिडेन ने मुम्बई की यात्रा पर (2013) में एक स्वागत समारोह में बताया था कि उनके पूर्वज जार्ज बिडेन ईस्ट इंडिया कम्पनी की सेना में अधिकारी थे। तब बिडेन बराक ओबामा के उपराष्ट्रपति थे। (टाइम्स आफ इंडिया, लखनऊ, छह कालम रपट पृष्ठ—10, तारीख—9 नवम्बर 2020) पाकिस्तानी मीडिया का यह भी प्रचार है कि नव—निर्वाचित उपराष्ट्रपति कमला हैरिस पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में मानवाधिकार—उल्लंघन की आलोचक रहीं हैं। अत: वे अब सरकारी तौर पर पाकिस्तानी दृष्टिकोण को अपना बनायेंगी। ओकलैंड (कैल्फिोनिर्या) के केसर अस्पताल में 20 अक्टूबर 1964 को जन्मी भारतीय मां (पी.श्यामला अय्यर) की पुत्री कमला अय्यर पिछले माह चुनाव अभियान में थी तो उन्होंने 108 नारियल से दक्षिण चेन्नई समीपस्थ अपने गांव तुलासुन्दरपुरम के अग्रहारम (मंदिर) में विजय हेतु विशिष्ट आराधना करायी थी (दैनिक हिन्दू, चैन्नई)।

कमला ने प्रो. डगलस एमहॉफ से विवाह किया जो यहूदी है। अर्थात इस्लामी पाकिस्तान एक यहूदी की बीवी को अपना हमदर्द कह रहा है। कमला हैरिस अपने नाना पीवी गोपलन के पास नई दिल्ली आती रहतीं थीं। वे प्रधानमंत्री कार्यालय में अधिकारी थे जब जवाहरलाल नेहरू कार्यरत थे। दिल्ली में उनमें तमिलभाषी संबंधियों ने अपने बधाई संदेश में कमला को लिखा था कि ”इस बार दीपावली एक महीने पहले ही आ गई।”

कमला हैरिस की जीत का पहला परिणाम हुआ कि इस सप्ताह वांशिगटन में सरकारी सलाहकारों की नियुक्ति हुई उनमें बीस भारतीय मूल के है। कोविड से लड़ने की शीर्ष समिति में डा. वी कृष्णमूर्ति है जो पूर्व सर्जन जनरल थे। दक्षिण भारतीय है।

एक खास बात। बराक ओबामा भी ट्रम्प की भांति पूर्व नरेन्द्र मोदी के गांव वडनगर गये थे, वहां झूले पर साथ डोले थे। साबरमती तट पर टहले थे। मोदी उन्हें ”बराक” कहकर पुकारते थे। आत्मीयता का सूचक है। बिडेन के लिए ओबामा ने गत माह चुनावी अभियान किया था।

लब्बे लुआब यही है कि पाकिस्तान को समझने में समय लगेगा कि नया अमेरिका रिचर्ड निक्सन वाला नहीं जिसने बांग्लादेश युद्ध के समय भयावह सातवें जहाजी बेडे को कलकत्ता रवाना कर दिया था। हालांकि तब तक फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ ने पूर्वी पाकिस्तान को इस्लामी पाकिस्तान की दासता से मुक्त करा लिया था। अर्थात आज भी फौज—नियंत्रित पाकिस्तान की तुलना में लोकतांत्रिक भारत को अमेरिकी जनता कहीं अधिक पंसद करती है। मगर पाकिस्तानी मीडिया काले को सफेद करने पर तुली है। मानों उसकी कमीज भारत से ज्यादा धवल है।

 

©के. विक्रम राव, नई दिल्ली

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