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डेंगू का कहर जारी, एक दशक बाद नोएडा में मरीजों का आंकड़ा 500 के पार, तमाम कवायदों के बाद भी नहीं थम रही रफ्तार, 24 घंटे में 18 मिले ….

नई दिल्ली। इस वर्ष डेंगू के मरीजों ने एक दशक का रिकॉर्ड तोड़कर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग की तमाम कवायदों के बावजूद नोएडा जिले में डेंगू और मलेरिया की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले साढ़े 3 माह से स्वास्थ्य विभाग एंटी लार्वा दवा के छिड़काव और फॉगिंग पर लाखों रुपये खर्च कर चुका है, लेकिन डेंगू मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, दस वर्ष बाद जिले में पहली बार डेंगू के मरीजों का आंकड़ा 500 से ऊपर पहुंचा है।

डेंगू को लेकर हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं। यह स्थिति तब है, जबकि जिला मलेरिया विभाग नोएडा प्राधिकरण और अन्य विभागों के साथ मिलकर बीमारियों की रोकथाम के लिए अभियान चला रहा है, मगर इस अभियान का धरातल पर असर नहीं दिखाई दे रहा है। जिले में डेंगू ने सितंबर में दस्तक दी थी। पहले 30 दिनों में जिले में डेंगू के 49 मामले सामने आए थे, लेकिन मरीजों की संख्या को मामूली मानते हुए स्वास्थ्य विभाग लापरवाह बना रहा और मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए जिले में कोई प्रयास नहीं किए गए। इसी का परिणाम है कि अक्टूबर में डेंगू ने भयावह रूप धारण कर लिया। अब प्रतिदिन जिले में 15 से 20 नए डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। अक्टूबर में जिले में 376 नए डेंगू के मरीज मिले हैं, लेकिन शनिवार को यह आंकड़ा 509 तक पहुंच गया।

नवंबर के पहले सप्ताह में अभी तक 133 मरीज मिल चुके हैं, जिसके चलते ब्लड बैंकों में प्लेटलेट्स की मांग पांच गुना तक बढ़ गई है। अब तक कई डेंगू संदिग्धों की मौत भी हो चुकी है, लेकिन सरकारी तंत्र अब तक जिले में मात्र एक मरीज की मौत होने का दावा कर रहा है। सरकारी स्तर पर इलाज की अच्छी व्यवस्था न होने के चलते डेंगू लोगों को तगड़ी हानि पहुंचा रहा है। निजी अस्पतालों में बीमारी का इलाज कराने के लिए लोगों को 50 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

पहली बार जिले में डेंगू के उपचाराधीन मरीजों का आंकड़ा 68 पर पहुंचा है। खास बात यह है कि सक्रिय डेंगू मरीजों में 80 फीसदी निजी अस्पतालों में ही इलाज करा रहे हैं। जिला अस्पताल के वार्ड में मात्र तीन डेंगू के मरीज ही भर्ती हैं, वहीं चाइल्ड पीजीआई में चंद बच्चों का ही इलाज चल रहा है। सरकारी स्तर पर इलाज की बेहतर व्यवस्था न होने के चलते शेष मरीज निजी अस्पतालों पर निर्भर है, जहां उन्हें गाढ़ी कमाई लुटानी पड़ रही है। पिछले 24 घंटे में जिले में 18 नए डेंगू के मरीज मिले हैं।

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