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दिल्ली दंगे मामले में आया पहला फैसला, भीड़ में शामिल होने और दुकान लूटने का एक आरोपी बरी…

नई दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़े एक मामले में दुकान में अवैध तरीके से जमा होने और लूटपाट के एक आरोपी को दिल्ली कड़कडूमा कोर्ट ने मंगलवार को बरी कर दिया। दिल्ली हिंसा के संबंध में यह पहला मामला है, जिसमें फैसला सुनाया गया है।

कड़कड़डूमा कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत की अदालत ने आज आरोपी सुरेश उर्फ ​​भटूरा को इस मामले से बरी कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी सुरेश उर्फ ​​भटूरा अवैध तरीके से जमा हुई भीड़ का हिस्सा था जो लाठियों और सरियाओं से लैस था और दंगा करता था और उसने शिकायतकर्ता आसिफ की दुकान का शटर तोड़ दिया था। इस दुकान का मालिक भगत सिंह था।

अदालत ने 9 मार्च, 2021 को आरोपी सुरेश के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 454, 395 और अन्य विभिन्न अपराधों के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था। अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर सुरेश उर्फ ​​भटूरा के खिलाफ आईपीसी की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा), 147 (दंगा), 427 (नुकसान पहुंचाना), धारा 149 और 395 के साथ आईपीसी की धारा 454 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।

दिल्ली पुलिस ने आरोपी सुरेश के खिलाफ आईपीसी की धारा 143/147/149/454/395 के तहत चार्जशीट दाखिल की थी। शिकायतकर्ता आसिफ ने बताया था कि 25 फरवरी, 2020 की शाम दिल्ली के मेन बाबरपुर रोड स्थित उसकी दुकान में हाथों में सरिया और लाठी लेकर लोगों की भारी भीड़ घुस आ ई और उस पर हमला कर दिया। भीड़ में शामिल लोगों ने शटर का ताला तोड़ दिया और दुकान को लूट लिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, दुकान का मालिक भगत सिंह था और आसिफ को दुकान किराये पर दी गई थी। शिकायत के अनुसार, दुकान में लूटपाट की गई। अभियोजन पक्ष ने कहा है कि दुकान के मालिक भगत सिंह ने बयान दिया था कि कुछ लोग थे जो दूसरों की दुकानों को नुकसान पहुंचाने और लूटने के लिए उकसा रहे थे क्योंकि यह एक मुस्लिम की दुकान थी। गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में साम्प्रदायिक दंगे भड़क गए थे।

इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। साथ ही सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा था। उग्र भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूंक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया था।

इस दौरान राजस्थान के सीकर के रहने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की 24 फरवरी को गोकलपुरी में हुई हिंसा के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी और डीसीपी और एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल गए थे। साथ ही आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश नाले में फेंक दी गई थी।

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