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उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों का हाल बेहाल, रिजल्ट बंटा नहीं और बच्चे पास हो गए …

लखनऊ। योगी राज में आलम यह है कि रिजल्ट छप कर भी नहीं आए और बच्चे दूसरी कक्षा में पहुंच गए। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में नया सत्र शुक्रवार से शुरू हो गया लेकिन ज्यादातर जिलों में रिपोर्ट कार्ड नहीं बांटा जा सका। इसका अंदेशा विभाग को पहले ही था इसीलिए 30 मार्च को बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया कि अगर रिजल्ट छप कर न पहुंचे हों तो विद्यार्थियों की कक्षोन्नति कर दी जाए। रिजल्ट अगले 3 दिनों में बांट दिया जाए। रिजल्ट के लिए प्रति विद्यार्थी 2 रुपये दिया जाता है। रिजल्ट तैयार करने के दिशा निर्देश 25 मार्च को जारी किए गए जबकि समग्र शिक्षा अभियान के तहत बजट 29 मार्च को जारी हुआ।

ये लापरवाही सिर्फ रिजल्ट के।साथ ही नहीं बल्कि परीक्षाओं के साथ भी की गई। इस बार यूपी बोर्ड परीक्षाएं विधान सभा चुनाव के कारण 24 मार्च से शुरू हुईं। इसमें परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई। ये शिक्षक 13 अप्रैल तक अपने स्कूलों से कार्यमुक्त हो गए। ज्यादातर जिलों में स्कूल एकल शिक्षक रह गए या फिर शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के भरोसे रह गए। कई बीएसए ने यह तक आदेश जारी कर दिया कि शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को परीक्षा की जिम्मेदारी दी जाए।

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन एसोसिएशन प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने बताया कि प्राइमरी व जूनियर  स्कूलों की परीक्षा को मजाक बना लिया गया है।  एक तरफ अधिकतर शिक्षकों को परिषदीय परीक्षा के दिन ही यूपी बोर्ड की परीक्षा में लगा दिया गया। फिर इसके बाद मार्च के अंतिम हफ्ते में बजट का एडजस्टमेंट करने के लिए  लगातार तीन-चार दिन शिक्षकों को प्रशिक्षण में लगा दिया। आखिरी दिन विद्यार्थियों को शिक्षकों को परीक्षाफल सुना दिया गया।

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