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क्लर्क की बाइक लेकर फरार आरोपी हुआ गिरफ्तार, सब इंस्पेक्टर बनकर दिया था झांसा…

बिलासपुर। नकली सब इंस्पेक्टर बनकर क्लर्क की बाइक चोरी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली है। आरोपी ने क्लर्क को भरोसे में लेकर वाहन चेकिंग के बहाने गाड़ी लेकर फरार हो गया था। घटना के चार दिन शातिर चोर को पकड़ा गया। मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र की है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार सरकंडा थाना क्षेत्र के ग्राम मोपका निवासी रोहित शर्मा शिक्षा विभाग में क्लर्क है और कोरबा जिले के पाली में उनकी पोस्टिंग है। 7 दिसंबर को रोहित अपनी बाइक से बिलासपुर आ रहे थे। तभी बेलतरा के पास एक युवक ने उससे लिफ्ट मांगी। इस दौरान बातचीत में युवक ने अपना नाम अरूणदास मानिकपुरी बताया। साथ ही पुलिस विभाग का सब इंस्पेक्टर बताते हुए सिटी कोतवाली थाने में पदस्थ होने की जानकारी दी। बिलासपुर पहुंचने के बाद युवक ने क्लर्क को नेहरू चौक तक छोड़ने की बात कही।

नेहरु चौक पहुंचने से पहले ही उसने क्लर्क को झांसा दिया कि वहां पुलिस की चेकिंग चल रही है। उसने जांच से बचने के लिए बाइक मांगी और उन्हें पैदल नेहरु चौक बुलाया। उसकी बातों में आकर क्लर्क कुछ दूर पैदल चलने के लिए तैयार हो गया। पैदल नेहरु चौक पहुंचने के बाद क्लर्क युवक का इंतजार करता रहा, लेकिन वह पहुंचा ही नहीं। इसके बाद उन्होंने ठग के दिए मोबाइल नंबर पर भी संपर्क किया, लेकिन, बंद मिला। शनिवार को पुलिस ने अरुण दास मानिकपुरी को कोरबा में दबिश देकर पकड़ लिया।

भरोसे में लेने के क्लर्क को दिया था मोबाइल नंबर

क्लर्क से बातचीत करते हुए अरूण दास ने करीब 30 किलोमीटर सफर तय किया। बिलासपुर पहुंचने से पहले उन्हें भरोसे में लेने के लिए उसने अपना मोबाइल नंबर भी दिया और पुलिस में काम होने पर याद करने कहा। इस दौरान उसने सरकंडा थाने में परिचित के पुलिसवालों से मिलने की बात भी की। क्लर्क उसे लेकर सरकंडा थाना के सामने भी गए। फिर छोड़ने के लिए नेहरु चौक जा रहे थे। तभी उसने झांसा दिया और बाइक लेकर फरार हो गया।

नंबर ट्रेस करने पर पकड़ाया आरोपी

अपने आप को पुलिस वाला बताने वाला युवक अरुणदास ने क्लर्क रोहित शर्मा को दो मोबाइल नंबर दिया था। जिसमें से अपने मोबाइल नंबर को उसने बंद कर दिया था। जबकि, दूसरा नंबर उसके बड़े पिता के बेटे का था। पुलिस ने दोनों नंबर को ट्रेस किया। तब उसके बड़े पिता के बेटे से संपर्क हुआ। पुलिस ने उसे थाने में बैठाकर पूछताछ की और अरूण दास की जानकारी जुटाई। उसकी मदद से पुलिस आरोपी तक पहुंची और वह गिरफ्त में आ गया।

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