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ठाकरे के ऐक्शन पर शिंदे का रिएक्शन, सत्ता के लिए मैंने हिंदुत्व से गद्दारी नहीं की …

नई दिल्ली। 26 विधायकों के साथ पार्टी के सीनियर नेता और मंत्री एकनाथ शिंदे सूरत में कैंप कर रहे हैं। एक तऱफ उद्धव ठाकरे ने आपातकालीन बैठक बुला ली है तो वहीं उत्साहित भाजपा के सीनियर नेताओं की दिल्ली में बैठक चल रही है। बीते करीब ढाई साल से चली आ रही उद्धव ठाकरे सरकार को यह झटका उनके ही करीबी नेता एकनाथ शिंदे ने दिया है। शिंदे के बारे में जानने वाले लोग बताते हैं कि वह शिवसेना के संकटमोचक रहे हैं। ऐसे में उनकी ओर से दिए गए झटके से शिवसेना का संभलना मुश्किल होगा। एकनाथ शिंदे की शिवसेना पर कितनी पकड़ रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह बाल ठाकरे के भी बेहद करीबी थी।

कई विधायकों को लेकर सूरत पहुंचे एकनाथ शिंदे के खिलाफ उद्धव ठाकरे ने कड़ा ऐक्शन लिया है। उन्हें शिवसेना के विधायक दल के नेता के पद से हटा दिया गया है। इस ऐक्शन के तुरंत बाद एकनाथ शिंदे ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और उद्धव ठाकरे पर सत्ता के लिए हिंदुत्व से धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। एकनाथ शिंदे ने ट्वीट किया, ‘हम बालासाहेब ठाकरे के कट्टर शिवसैनिक हैं। बालासाहेब ने हमें हिंदुत्व की सीख दी थी। हमने कभी इससे धोखा नहीं किया गया था और न ही कभी हिंदुत्व से गद्दारी करेंगे। हम बालासाहेब ठाकरे की सिखाई हुई बातों के साथ हैं।’

एकनाथ शिंदे के ट्वीट से साफ है कि वह भाजपा के साथ जाने की तैयारी में हैं। उद्धव ठाकरे को बालासाहेब की हिंदुत्व की सीख याद दिलाते हुए एकनाथ शिंदे ने साफ कर दिया है कि शिवसेना की गठबंधन सरकार से संतुष्ट नहीं थे। बता दें कि शिवसेना ने एकनाथ शिंदे पर कड़ा ऐक्शन लेते हुए उन्हें पार्टी के विधायक दल के नेता के पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर सेवरी के विधायक अजय चौधरी को पार्टी हाईकमान ने यह जिम्मेदारी दी है। एकनाथ शिंदे को बालासाहेब ठाकरे के भरोसेमंद नेताओं में से एक माना जाता था। ऐसे में बालासाहेब ठाकरे की ही सीख का हवाला देते हुए उन्होंने उद्धव ठाकरे पर हमला बोला है।

शिवसेना और एकनाथ शिंदे के करीबी सूत्र भी बताते हैं कि वह पार्टी में किनारे लगाए जाने से नाराज थे। दरअसल वह एनसीपी को गठबंधन में ज्यादा महत्व मिलने से नाराज थे। एक तरफ उद्धव ठाकरे सीएम बन गए और उनके बेटे आदित्य ठाकरे को भी मंत्री पद मिल गया, लेकिन शिवसैनिकों की समस्याओं को सुनने के लिए कोई नेता उपलब्ध नहीं था। ऐसे तमाम मुद्दों पर एकनाथ शिंदे की लीडरशिप से नाराजगी बढ़ती चली गई। कहा यह भी जा रहा है कि एकनाथ शिंदे खुद को सीएम के तौर पर देख रहे थे, लेकिन एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन के अप्रत्याशित तौर पर उद्धव ठाकरे ही सीएम बन गए थे।

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