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एम्स के अध्ययन में खुलासा : 19 फीसदी लोगों को लगता है नकली या खराब है कोरोना का टीका …

नई दिल्ली। कोरोना वैक्सीन के बारे में लोगों की क्या राय है, यह जानने के लिए एम्स के डॉक्टरों ने 1294 लोगों की राय जानी तो इसमें चौंकाने वाले नतीजे मिले। सर्वे में यह भी सामने आया कि युवा आबादी के मुकाबले 45 साल से अधिक उम्र के लोग टीका लेने के ज्यादा इच्छुक हैं।

कोरोना के खिलाफ टीका न सिर्फ लोगों की जान बचा रह है बल्कि उन्हें गम्भीर रूप से बीमार होने से भी बचा रह है, लेकिन टीके के बारे में जनता के मन में अब बी काफी भ्रम और गलत बातें मौजूद हैं। 19 फीसदी लोगों का मानना है कि कोरोना की वैक्सीन नकली या खराब है। इतना ही नहीं 30 फीसदी लोगों का मानना है कि वैक्सीन लगवाने के तुरंत बाद इसके गम्भीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के एक ताजा अध्ययन में यह बात सामने आई है।

सर्वे में शामिल 1294 लोगों में 83.6 फीसदी लोगों ने यह बात स्वीकार की कि वे टीका लगवाने के इच्छुक हैं। 10.75 फीसदी लोगों ने इसमें न तो सहमति जताई और न ही असहमत हुए। वहीं 5.65 लोगों ने कहा कि वे टीका लेने के इच्छुक नहीं हैं। इसके अलावा 6.8 फीसदी लोगों को लगता है कि टीका लगवाने में नुकसान है। वहीं 77 फीसदी लोगों को लगता है कि टीका लगवाने में कोई नुकसान नहीं है। 16 फीसदी लोग टीके लगवाना नुकसान देह नहीं है के सवाल पर न तो सहमत हैं और न ही असहमत।

शोध में टीके को लेकर झिझक की वजह जानने की कोशिश की गई तो सबसे बड़ी वजह यह पता चली कि लोग टीके के दुष्प्रभाव को लेकर चिन्तित हैं। 35 फीसदी लोग इस बात से सहमत हैं कि टीके लगवाने के बाद भविष्य में इसके दुष्प्रभाव हो सकते हैं। 30 फीसदी को लगता है कि टीका लगवाने के तुरंत बाद गम्भीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। 19 फीसदी लोगों को लगता है कि टीका नकली या खराब है। 22 फीसदी को लगता है कि ये फार्मा कम्पनियों के फायदे के लिए हैं। 35 फीसदी को लगता है कि टीका आसानी से उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरी क्षेत्र के लोगों में इस बात पर अधिक सहमति थी कि टीका आसानी से उपलब्ध नहीं है।

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