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नस्लीय टिप्पणी से अश्वेत महिला क्रिकेटर का छलका दर्द, धमकियों से भरा लेटर किया शेयर…

नई दिल्ली। इंग्लैंड की पहली महिला अश्वेत क्रिकेटर एबोनी रैनफोर्ड ब्रेंट ने भी नस्लवाद को लेकर अपना दर्द व्यक्त किया है। उन्होंने बताया है कि इंग्लैंड के लिए 2001 में करियर शुरू करने के दौरान उन्हें कई धमकी और गाली भरे लेटर और मेल का सामना करना पड़ता था। उनमें से ही एक लेटर एबोनी ने शेयर किया है जिसमें काफी भद्दी बातें अंग्रेजी में लिखी हुई हैं।

2001 में महज 17 वर्ष की उम्र में एबोनी ने इंग्लैंड के लिए डेब्यू किया था। उस वक्त वे इकलौती और पहली अश्वेत महिला क्रिकेटर थीं। जिसके लिए उन्हें काफी नस्लीय टिप्पणियों का सामना भी करना पड़ा। उनको लगातार वापस जाने और व्हाइट क्रिकेट कल्चर की दुहाई देते हुए धमकियां और गालियां दी गई थीं।

इंग्लैंड के पूर्व काउंट्री क्रिकेटर अजीम रफीक द्वारा सबसे पहले नस्लवाद के लिए उठाई गई आवाज के बाद से ये मुद्दा इंग्लैंड में काफी गर्माया हुआ है। एक के बाद एक कई अन्य देशों के क्रिकेटर्स ने इसकी शिकायत करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में अब एबोनी रैनफोर्ड ब्रेंट का भी नाम जुड़ गया है। जिन्होंने अपने ऑफिशियल ट्विटर पर एक लेटर शेयर करते हुए अपना दर्द व्यक्त किया।

इसके अलावा भारत के पूर्व विकेटकीपर फारूक इंजीनियर ने भी नस्लवाद को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ दी है। उन्होंने बताया है कि उन्हें भी इंग्लैंड में भद्दे और अश्लील कमेंट्स झेलने पड़े थे। भारतीय दिग्गज ने बताया कि इंग्लैंड में अपना कमेंट्री करियर शुरू करने के दौरान मुझे कई बार इन चीजों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि, ‘जब मैंने इंग्लैंड में बतौर कमेंटेटर शुरुआत की तो मुझे भी कई बार नस्लवाद झेलना पड़ा। दो ऐसे लोग थे जो मुझ पर अश्लील टिप्पणी करते थे जो सुनने में अच्छी नहीं लगती थीं। कई बार मैंने ऐसी टिप्पणियां सुनीं जो मेरे रंग, मेरे भारतीय कल्चर को लेकर होती थीं। मैंने ऐसी उम्मीद नहीं की थी। जब मैं विरोध करता था तो वे चुप हो जाते थे।’

गौरतलब है कि सबसे पहले अजीम रफीक द्वारा नस्लवाद को लेकर आवाज उठाने के बाद इंग्लैंड क्रिकेट में भूचाल आ गया। माइकल वॉन से लेकर मैथ्यू होगार्ड तक कई बड़े नाम सामने आए। यॉर्कशायर क्रिकेट क्लब के अध्यक्ष को भी हटा दिया गया था। वहीं अब इस मामले में भारतीय दिग्गज के द्वारा खुलासा करने के बाद ये मामला और तूल पकड़ सकता है।

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