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बिजली संकट ने बढ़ाया नरेंद्र मोदी सरकार पर बोझ, 1.9 करोड़ टन कोयले का आयात करेगा भारत, छह सालों में सबसे खराब बिजली संकट …

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों में पड़ रही भीषण गर्मी ने बिजली की खपत में भी इजाफा कर दिया है। लेकिन कोयले की सप्लाई में कमी ने एक नया संकट पैदा कर दिया है और कई राज्यों में पावर कट हो रहा है। इस बीच सरकार संकट से निपटने के लिए कोयले के आयात को बढ़ाने पर विचार कर रही है। एक रिपोर्ट बताती है कि भारत जून तक विदेश से 1.9 करोड़ टन कोयले के आयात को लेकर काम कर रहा है। बढ़ते गर्मी के कारण बढ़ रहे बिजली खपत को देखते हुए भारत सरकार यह कदम उठा रही है। बता दें कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला आयातक देश है और बिजली के बढ़ते खपत को देखते हुए और कोयला मंगवा रहा है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल में पड़े भयंकर गर्मी के कारण भारत में पिछले छह सालों में सबसे खराब बिजली संकट पैदा हो गया है। बिजली मंत्रालय ने कहा है कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार के स्वामित्व वाली यूटिलिटीज को 22 मिलियन टन कोयले और निजी बिजली संयंत्रों को आयात करने के लिए 15.94 मिलियन टन आयात करने के लिए कहा है। राज्य के ऊर्जा विभागों के टॉप अधिकारियों को लिखे गए चिठ्ठी में बिजली मंत्रालय ने 30 जून तक आवंटित मात्रा का 50%, अगस्त के अंत तक 40% और अक्टूबर के अंत तक शेष 10% की डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

अप्रैल 2022 में भारत में बिजली की मांग 13.6 फीसद बढ़कर 132.98 बिलियन यूनिट पहुंच गई है। बता दें कि अप्रैल 2021 में देश में बिजली की खपत 117.08 बिलियन यूनिट थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखंड में करीब 12 फीसद कम बिजली की आपूर्ति की जा रही है। झारखंड के साथ ही मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी बिजली आपूर्ति की कमी देखी जा रही है।

देश के कुल 150 पावर प्लांट्स में 88 प्लांट्स में कोयले की कमी रिपोर्ट है। आसान भाषा में इसका मतलब यह है कि भारत के 60 फीसद प्लांट्स कोयले की कमी का सामना कर रहे हैं। जिन 88 पावर प्लांट्स में कोयले की कमी है उसमें से 42 राज्य सरकार, 32 प्राइवेट, 12 केंद्र सरकार और 2 जॉइंट वेंचर के अधीन हैं।

 

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