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पीयूष गोयल ने कहा- चेयर पर हुआ कातिलाना हमला, राज्यसभा में हंगामे को लेकर विपक्ष बरसे केंद्र के 7 मंत्री …

नई दिल्ली । राज्यसभा में लगातार कई दिनों तक हुए हंगामे की लड़ाई अब सड़क पर आ गई है। एक तरफ विपक्षी दलों ने मार्च निकाला तो वहीं केंद्र सरकार के 7 मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हमला बोला है। राज्यसभा के नेता सदन पीयूष गोयल ने कहा कि हम दुख के साथ यहां आए हैं कुछ सांसदों ने मंत्री के हाथों से जब पर्चे छीन लिए और उन्हें सस्पेंड किया गया। तो हमारा कहना था कि आप माफी मांग लो। इस पर भी उन्होंने माफी से इनकार कर दिया। पीयूष ने कहा, ‘विपक्ष के सांसदों ने बेंचों पर खड़े होकर हंगामा किया। यही नहीं एक सांसद ने तो रूल बुक ही चेयर पर फेंक दी थी। यदि उस समय कोई चेयर पर होता तो कुछ भी हो सकता था। यह एक तरह का कातिलाना हमला था।’

उन्होंने कहा कि 6 सांसद कांच तोड़कर जबरन सदन में घुसे थे। पीयूष ने कहा कि विपक्ष के सांसदों ने एक महिला मार्शल पर भी हमला कर दिया। हम विपक्ष की निंदा करते हैं कि उनकी मंशा सदन की गरिमा गिराने की रही है। उनकी मंशा थी कि सदन को चलने न दिया जाए। पीयूष ने आरोप लगाते हुए कहा कि अब विपक्ष नाटक कर रहा है और उलटे प्रदर्शन कर रहा है। पीयूष गोयल ने कहा कि हमने जब 9 तारीख को हुए हंगामे और उपद्रव पर चिंता जाहिर की तो उन्होंने कहा कि अब इससे भी बड़ा कुछ होगा।

गोयल से पहले विपक्ष पर बरसते हुए संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि मॉनसून सेशन के पहले दिन से ही विपक्ष का बर्ताव सही नहीं था। वे संसद को चलने नहीं देना चाहते थे और इस बात का पूरा खुलासा टीएमसी और कांग्रेस के सांसदों ने कर दिया। इससे सेशन पूरी तरह से धुल गया। जोशी ने कहा कि विपक्ष की ओर से नए मंत्रियों का परिचय तक नहीं कराने दिया गया। हमारी ओर से विपक्ष से कई बार निवेदन किया गया, लेकिन वे नहीं माने। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस तरह से उपद्रव करने के बाद भी उन्हें अच्छा लग रहा है और उन्हें लगता है कि जैसे किसी स्वतंत्रता सेनानी जैसा काम उन्होंने किया है।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष के सांसदों ने शीशा तोड़ने की भी कोशिश की। इससे पता चलता है कि आखिर उनकी सोच क्या है। हम चेयरमैन से उपद्रव करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग करते हैं। जोशी ने कहा कि हम विपक्ष की बात को सुनने के लिए तैयार रहे हैं और सोमवार तक सदन चलाने को भी तत्पर थे। लेकिन उनके बर्ताव के चलते ऐसा नहीं हो सका। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी माफी की मांग की।

उनसे पहले अनुराग ठाकुर ने कहा कि आम लोग संसद में अपने मुद्दों को उठाए जाने का इंतजार ही करते रहे। लेकिन संसद में अराजकता ही जारी रही। उन्होंने आम लोगों की और करदाताओं के पैसे की कोई चिंता नहीं है। जो कुछ भी हुआ, वह निंदाजनक है। उन्हें मगरमच्छ के आंसू बहाने की बजाय देश से माफी मांगनी चाहिए।

इससे पहले बुधवार को बीजेपी के कई नेताओं ने राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू से मिले थे। इसके अलावा गुरुवार सुबह एनसीपी चीफ शरद पवार और शिवसेना के नेता संजय राउत ने भी उपराष्ट्रपति से मुलाकात की थी। उनके अलावा कई और विपक्षी नेताओं ने उपराष्ट्रपति से मुलाकात की थी। राज्यसभा में मंगलवार और बुधवार को जमकर हिंसा हुई थी और सांसद आपस में झड़प करते दिखे। इस संबंध में एक वीडियो भी राज्यसभा की ओर से जारी किया गया है। इस उपद्रव को लेकर जहां सरकार ने विपक्ष पर हमला बोला है तो वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार की ओर से जरूरी मुद्दों पर बोलने नहीं दिया गया और अब मुद्दे से भटकाया जा रहा है।

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