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ओबीसी एकता संघ ने सीएम शिवराज सिंह को सौंपा ज्ञापन : जनगणना फॉर्मेट में ओबीसी वर्ग का कॉलम रखने की मांग…

छतरपुर। ओबीसी एकता संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील पवार के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मिला और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में 2021 में होने वाली जनगणना के फार्मेट में ओबीसी जाति का कॉलम अलग से रखने की मांग की गई।

 

ज्ञापन में मुख्य रूप से जनगणना फॉर्मेट में ओबीसी का कॉलम बनवाने, ओबीसी की जातिगत गिनती करने, मप्र के विभिन्न शासकीय संस्थानों में अध्यनरत ओबीसी के छात्रों को मिलने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की पात्रता के लिए माता-पिता, अभिभावक की वार्षिक आय सीमा का बंधन समाप्त करने तथा अशासकीय संस्थाओं के लिए वार्षिक आय सीमा 8 लाख रुपए किए जाने जैसे बिंदुओं को प्राथमिकता दिए जाने की मांग की गई है।

 

ज्ञापन में कहा गया है कि आजादी के पूर्व भारत में जातिगत जनगणना होती थी। लेकिन, आजादी के बाद से आज तक जातिगत जनगणना नहीं हुई है, जिसका खामियाजा ओबीसी वर्ग को भुगतना पड़ रहा है। भारत में जातिगत जनगणना अंतिम बार 1931 में हुई थी। 1931 की जनगणना के आधार पर ही द्वितीय पिछड़ा वर्ग आयोग अर्थात मंडल कमीशन ने पिछड़ी जातियों की आबादी 52 प्रतिशत बताई थी और उसके लिए आरक्षण की सिफारिश की थी।

 

2021 में होने वाली जनगणना में दूसरे वर्ग का कॉलम है, लेकिन ओबीसी वर्ग का कॉलम नहीं है। ऐसे में ओबीसी वर्ग को मिलने वाला संवैधानिक हक नहीं मिल पाता है। इसके अतिरिक्त ओबीसी वर्ग की कुल जातियों की वास्तविक संख्या की जानकारी भी नहीं मिल पाती है। अत: जनगणना फॉर्मेट में ओबीसी वर्ग का कॉलम होना ही चाहिए। इसके अलावा भी कई मुद्दों को उठाया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हमें आश्वस्त किया है कि जल्द से जल्द ही इनका निराकरण किया जाएगा।

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