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अब मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में गहलोत की चलेगी…

जयपुर। वल्लभनगर और धरियावद सीटों पर हुए उपचुनाव और अलवर-धौलपुर पंचायतीराज चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजनीतिक रूप से मजबूती देने के साथ अब कुछ हद तक सुरक्षित भी कर दिया है। गहलोत को अब कांग्रेस हाईकमान से इन फैसलों के लिए काफी हद तक फ्री हैंड मिल सकता है। हालांकि अब मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का मामला थोड़ा और आगे खिसक सकता है।

सचिन पायलट कैंप की मांगों को अब जल्द पूरा करने पर संशय के हालात बन गए हैं। पायलट खेमा मंत्रिमंडल, राजनीतिक नियुक्तियों और संगठन में बराबर की हिस्सेदारी चाहता है। पायलट कैंप की मांगों को लेकर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी में चर्चा हो चुकी है। फिलहाल राजनीतिक रूप से अशोक गहलोत मजबूत हुए हैं, इसलिए वे अपने खेमे के लिए ज्यादा पक्ष लेने के हालत में होंगे।

बसपा से कांग्रेस में आने वाले छह विधायक, सरकार का समर्थन करने वाले निर्दलीय विधायक और गहलोत खेमे के वरिष्ठ कांग्रेस विधायक भी मंत्री पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं। गहलोत समर्थक विधायक भी लगातार लॉबिंग कर रहे हैं। अब पायलट कैंप अगर ज्यादा विधायकों को सरकार में भागीदारी के लिए दबाव बनाएगा तो गहलोत कैंप भी दावा करेगा। उपचुनाव और पंचायतीराज चुनाव के बाद गहलोत खेमे का कॉन्फिडेंस बढ़ा है।

उपचुनाव की जीत ने कई मंत्रियों को लाइफलाइन दे दी है। पहले जिन मंत्रियों काे मंत्रिमंडल से बाहर करने को लेकर चर्चाएं तेज थीं, उन मंत्रियों को भी लाइफ लाइन मिल गई है। जिन मंत्रियों के नाम हटने वालों में थे उनमें से कुछ पायलट कैंप के निशाने पर थे। अब बदले हालात में यह भी हो सकता है कि मुख्यमंत्री किसी को ड्रॉप किए बिना केवल विस्तार ही करें। हाईकमान के स्तर से हस्तक्षेप नहीं हुआ तो सीएम गहलोत अपने टाइम और अपने फॉर्मूला से मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक ​नियुक्तियां करेंगे।

उपचुनाव और दो जिलों में प्रमुख-प्रधान चुनाव की जीत के बाद सीएम अशोक गहलोत कैंप मजबूत भले हुए हों, लेकिन इससे कांग्रेस में खींचतान बढ़ने के आसार है। सचिन पायलट कैंप मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर राजनीतिक नियुक्तियों में अपनी हिस्सेदारी की मांग प्रमुखता से रखेगा। गहलोत अड़े तो फैसला फिर अटक सकता है। ताजा घटनाक्रम से सियासी समीकरण गहलोत के पक्ष में हैं। पायलट खेमा अपनी मांगें नहीं छोड़ेगा। सियासी संतुलन नहीं बनने की हालत में दोनों खेमों की खींचतान और तेज हो सकती है।

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