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देशद्रोह कानून की समीक्षा तक नहीं दर्ज होंगे नए केस? सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट में जवाब देगी मोदी सरकार …

नई दिल्ली। देशद्रोह कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से बुधवार तक अपना जवाब देने को कहा है। शीर्ष अदालत के समक्ष सरकार को बताना है कि क्या देशद्रोह कानून को रोका जा सकता है और इस कानून की समीक्षा के दौरान इसके तहत आरोपित लोगों की रक्षा की जा सकती है? यानि अदालत ने सरकार से पूछा है कि जब तक मोदी सरकार इस कानून की समीक्षा करे, तब तक उन लोगों के केस का क्या है, जो देशद्रोह कानून (IPC 124-A) के तहत आरोपी हैं। इसके अलावा फैसला आने तक इस तरह के नए मामले दर्ज होंगे या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान उन लोगों पर भी चिंता व्यक्त की जो पहले से ही देशद्रोह के आरोपों के तहत जेल में बंद हैं।

दरअसल, इससे पहले मोदी सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उसने देशद्रोह कानून के प्रावधानों की फिर से जांच और पुनर्विचार करने का फैसला किया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट में दायर नए हलफनामे में केंद्र ने कहा, “सरकार ने देशद्रोह कानून (धारा 124ए) के प्रावधानों का पुनरीक्षण और पुनर्विचार करने का निर्णय लिया है।” सरकार ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं के आधार पर मामले में फैसला करने से पहले सुप्रीम कोर्ट से समीक्षा के इंतजार करने का आग्रह किया।

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने मंगलवार को देशद्रोह कानून को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर तुषार मेहता से कहा, “हम आपको सरकार से निर्देश लेने के लिए कल सुबह तक का समय देंगे। हमारी चिंता लंबित मामलों और भविष्य की हैं, जब तक सरकार कानून की दोबारा जांच नहीं करती है, तब तक सरकार उनकी रक्षा कैसे करेगी।”

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