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एनईपी 2020 भारतीय छात्रों को ना केवल जिम्मेदार नागरिक बल्कि वैश्विक नागरिक बनाएगी: धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली । ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित वर्ल्ड यूनिवर्सिटीज समिट को आज संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार करने की जरूरत है और इसी को ध्यान में रखते हुए हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) लेकर आए हैं जो उच्च शिक्षा व्यवस्था को नए तरीके से परिभाषित करेगी.

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार जोर दिया है कि भारत का नैतिक दायित्व दुनिया को ना केवल जिम्मेदार नागरिक देना है बल्कि एक वैश्विक नागरिक देना भी है. हमारी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपने चार स्तंभों – गुणवत्ता, समानता, पहुँच और सामर्थ्य – के माध्यम से इसी दिशा में काम करेगी और इसी की बुनियाद पर एक नया भारत (न्यू इंडिया) उभरेगा.

इस समिट में उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ) डी पी सिंह, ओ पी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति नवीन जिंदल, संस्थापक कुलपति प्रोफेसर (डॉ) सी राज कुमार, रजिस्ट्रार प्रोफेसर दबीरु श्रीधर पटनायक एवं अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित थे.

समिट के बारे में बात करते हुए प्रधान ने कहा कि जब दुनिया भर के विश्वविद्यालय इस महामारी से उबरने के साथ साथ शिक्षा को अनवरत रूप से जारी रखने के लिए प्रयासरत हैं इस समय ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित यह समिट बेहद सामयिक है.

इस समिट में 25 देशों के 100 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, अध्यक्षों, रेक्टरों और प्रोवोस्ट सहित 150 से अधिक बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया.

शिक्षा मंत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में विस्तार से बात करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के “आत्मनिर्भर भारत” के विज़न को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है.

उन्होनें कहा, “अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए यह नीति ऐसी इनोवेशन और रिसर्च पर केंद्रित है जो हमारे समाज एवं वैश्विक समुदाय पर सीधा प्रभाव डालेगी. इससे भविष्य में हमारे शिक्षण संस्थान वैश्विक मापदंडों का पालन करते हुए बेहतर तालमेल के साथ काम करेंगे और मानव संसाधनों को मानव पूँजी में बदलेंगे.”

“हर प्रकार की बाधा समाप्त हो गई है और विकल्प एवं अवसर कई गुना बढ़ गए हैं इसलिए हमारे मल्टीडिसिप्लिनरी संस्थानों (एमईआरयू) के छात्र अपनी प्रतिभा को पहचान कर अपनी उच्च शिक्षा का बेहतर प्रयोग कर पाएंगे,” उन्होनें आगे कहा.

उन्होनें समग्र एवं बहु-विषयक शिक्षा के बारे में भी बात की और कहा कि क्षेत्रीय एवं स्थानीय भाषा में शिक्षा उपलब्ध करवाने का उद्देश्य यह है कि हर तबके के छात्र का समग्र विकास हो और किसी का नुकसान ना हो.

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ने नेशनल रिसर्च फाउंडेशन के बारे में भी बात करते हुए कहा कि इसकी स्थापना से देश में रिसर्च एवं इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और हमारी सरकार ने इसके लिए पांच वर्षों के लिए 50,000 करोड़ रुपए का फंड भी सुनिश्चित कर दिया है.

श्री प्रधान ने अकादमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट के बारे में भी सबको बताया और कहा कि इससे हमारी शिक्षा व्यवस्था को पहले से स्थापित वैश्विक मापदंड के साथ इंटीग्रेट करने में मदद मिलेगी और बड़ी संख्या में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को भारत में एवं भारतीय छात्रों को अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों में पढ़ने का, क्रेडिट ट्रांसफर करने का और शोध करने का अवसर प्राप्त होगा.

मंत्री ने कहा कि हमें भारत को एक वैश्विक शिक्षा के गंतव्य के रूप में बढ़ावा देना है जो कि कम कीमत पर प्रीमियम शिक्षा प्रदान करता है. “अच्छा प्रदर्शन करने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों को अन्य देशों में अपने कैंपस खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा और इसी तरह विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की सुविधा दी जाएगी. इसके अलावा हम उच्च गुणवत्ता वाले विदेशी संस्थानों के साथ अनुसंधान/शिक्षण सहयोग और फैकल्टी/स्टूडेंट एक्सचेंज की भी सुविधा उपलब्ध करवाएंगे. हम स्टडी इन इंडिया – स्टे इन इंडिया को ब्रांड के रूप में स्थापित करेंगे,” उन्होनें कहा.

इस समिट के आयोजन पर मंत्री ने ओ पी जिंदल यूनिवर्सिटी को बधाई देते हुए कहा कि भविष्य के विश्वविद्यालयों को यूनाइटेड नेशंस के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल 2030 के अनुरूप काम करना चाहिए और उन्हें समाज को सशक्त करने के अपने दायित्व को पहचानना चाहिए.

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