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नवजोत सिंह सिद्धू मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के घर तक जा पहुंचे, कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए विधायकों से मांगा समर्थन …

अमृतसर। राज्यसभा प्रताप बाजवा ने दिल्ली में अपने आवास पर पंजाब के सांसदों की बैठक आयोजित की। सांसद ने घोषणा की है कि वे सिद्धू को अध्यक्ष बनाने का विरोध करने के लिए एक रणनीति तैयार करेंगे और एआईसीसी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने का समय भी मांगेंगे।

पंजाब में कांग्रेस का अगला अध्यक्ष बनने की चर्चाओं में घिरे नवजोत सिंह सिद्धू रविवार को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के गृह क्षेत्र पटियाला पहुंचे और पार्टी विधायकों से मुलाकात की और उनसे समर्थन मांगा। द संडे एक्सप्रेस के मुताबिक, अमरिंदर सिंह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर हर फैसले का सम्मान करेंगे, लेकिन उन्होंने सिद्धू से मिलने से इनकार कर दिया। उन्होंने अपने खिलाफ सिद्धू के द्वारा “अपमानजनक” ट्वीट करने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है।

सिद्धू ने शूतराना विधायक निर्मल सिंह शूत्राना से मुलाकात की और बाद में कई विधायकों के साथ घनौर विधायक मदन लाल जलालपुर के घर गए। जलालपुर के घर पर कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा पहले से मौजूद थे।

पटियाला से सांसद और अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर के करीबी माने जाने वाले जलालपुर ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ सिद्धू की मेजबानी की। जलालपुर ने मीडिया से कहा, “मुझे रंधावा का फोन आया कि सिद्धू मुझसे मिलने आएंगे। मैंने उसके लिए चाय का इंतजाम किया है।”

आपको बता दें कि सिद्धू के खेमे ने कम से कम 30 विधायकों के साथ उनकी तस्वीरें भी जारी की, जिनसे वह शनिवार को मिले थे। सिद्धू के एक सहयोगी ने कहा कि समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या बढ़ रही है।

इस बीच, कम से कम 10 विधायकों ने अमरिंदर को अपना समर्थन दिया और सिद्धू से अपने ट्वीट के लिए माफी मांगने की मांग की। हालांकि, इनमें से तीन तकनीकी रूप से कांग्रेस के विधायक नहीं हैं। विधायक सुखपाल खैरा, निर्मल सिंह और जगदेव कमालू हाल ही में आप द्वारा निलंबित किए जाने के बाद कांग्रेस में शामिल हुए थे। शेष सात में हरमिंदर सिंह गिल, फतेह जंग सिंह बाजवा, गुरप्रीत सिंह जीपी, कुलदीप सिंह वैद, बलविंदर सिंह लड्डी, संतोख सिंह भलाईपुर, जोगिंदरपाल भोआ शामिल हैं, जो सभी कांग्रेस विधायक हैं।

एक बयान में, विधायकों ने पार्टी आलाकमान से अमरिंदर को निराश नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “उनके अथक प्रयासों के कारण पार्टी पंजाब में अच्छी तरह से स्थापित है।” विधायकों ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि राज्य पीपीसीसी प्रमुख की नियुक्ति पार्टी आलाकमान का विशेषाधिकार है, लेकिन पिछले कुछ महीनों के दौरान अंदरूनी कलह ने केवल पार्टी के ग्राफ को प्रभावित किया है।

विधायकों ने कहा कि चूंकि राज्य विधानसभा चुनाव के लिए केवल छह महीने बचे हैं, इसलिए पार्टी को अलग-अलग दिशाओं में खींचने से उसकी संभावनाओं को ही नुकसान होगा। उन्होंने अमरिंदर की इस मांग का भी समर्थन किया कि सिद्धू को मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के खिलाफ अपने ट्वीट के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

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