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प्रणेता साहित्य संस्थान दिल्ली का राष्ट्रीय ऑनलाइन पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह …

शकुंतला मित्तल। प्रणेता साहित्य संस्थान, दिल्ली द्वारा 25 जुलाई 2021 को ऑनलाइन पुस्तक विमोचन का आयोजन संस्थान के संस्थापक एवं महासचिव एस.जी.एस. सिसोदिया के मार्गदर्शन में और उपाध्यक्ष शकुंतला मित्तल के संयोजन और संचालन से सफलता पूर्वक संपन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सुश्री नीतिका सिसोदिया द्वारा माँ शारदे की वंदना तथा अतिथियों द्वारा माल्यार्पण के साथ हुआ। नीतिका सिसोदिया ने मधुर स्वर में माँ शारदे की सुमधुर प्रस्तुति से मंच को भक्ति रस से सराबोर कर मंत्रमुग्ध कर दिया। संस्थान की सचिव एवं वरिष्ठ लेखिका श्रीमती भावना शुक्ल ने सभी उपस्थित साहित्यकारों,अतिथियों और पदाधिकारियों का स्वागत किया।

यह गोष्ठी प्रतिष्ठित पत्रकार और लेखक सुभाष अखिल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। मंच पर सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश महामहिम अर्जन सीकरी की उपस्थिति ने मंच को एक नई ऊर्जा और गरिमा प्रदान की। मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध प्रतिष्ठित वरिष्ठ साहित्यकार बलराम अग्रवाल ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से मंच को सुशोभित किया। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में जानी मानी साहित्यिक विभूति श्रीमती कान्ता राय और विशिष्ट अतिथि के रूप में अंजू खरबंदा ने मंच को अपनी उपस्थिति से गौरवान्वित किया।

प्रणेता साहित्य संस्थान के इस भव्य आयोजन का संचालन शिक्षाविद और लेखिका श्रीमती शकुंतला मित्तल ने बहुत ही कुशलता से किया। आयोजन के प्रथम चरण का मुख्य आकर्षण लब्ध प्रतिष्ठित वरिष्ठ उपन्यासकार और कहानीकार एस.जी.एस. सिसोदिया के कहानी संग्रह ‘कसक’ और प्रतिष्ठित कवयित्री चंचल पाहुजा की पुस्तक ‘अशोकांजलि’ का विमोचन था। एस. जी. एस. सिसोदिया के इससे पूर्व 6 कहानी संग्रह ,1 लघुकथा संग्रह और 3 उपन्यास साहित्य जगत में अपनी धूम मचा चुके हैं।

सर्वप्रथम वरिष्ठ साहित्यकार अंजू खरबंदा ने पुस्तकों की समीक्षा करते हुए लेखकों को बधाई दी। अंजू खरबंदा ने प्रत्येक कहानी पर बहुत विस्तार से अपना विचार रखते हुए सभी कहानियों को सरल, रोचक और यथार्थपरक बताया। ‘अशोकांजलि’ के गीतों की गेयता को भी उन्होंने बहुत प्रशंसनीय कहा।

प्रणेता साहित्य संस्थान की संरक्षक एवं वरिष्ठ लेखिका पुष्पा शर्मा ‘कुसुम’ ने अपने उद्बोधन में कहा कि उपन्यास एवं कहानीकार एस. जी. एस. सिसोदिया के कहानी संग्रह ‘कसक’ में समाज के विभिन्न पहलुओं की कसक, व्यथा और संवेदनाओं को दर्शाती सरस और रोचक कथानक में बुनी 16 कहानियाँ हैं। सभी कहानियों में सामाजिक सरोकार का प्रत्येक चित्र और समाज को गढ़ कर उसे नव रूप देने की लेखक की गहरी जीवन दृष्टि प्रशंसनीय है।

गहरा सामाजिक चिंतन लिए सभी कहानियाँ रोचक, सरल, सरस, संदेशपरक हैं और पाठक हर कहानी को डूब कर पढ़ेगा ऐसी आशा व्यक्त करते हुए उन्होंने सिसोदिया को बधाई दी। लेखिका चंचल पाहुजा की पुस्तक ‘अशोकांजलि’ के गीतों की विविधता, गेयता और शब्द तथा भाव संयोजन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने लेखिका को अपनी शुभकामनाएँ दीं।

अति विशिष्ट अतिथि के रूप में लघुकथा के क्षेत्र में निरंतर शोध कार्य में संलग्न रह कर इस विधा को नए आयाम देने में प्रयासरत कान्ता राय ने ‘कसक’ कहानी संग्रह पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि इसमें संकलित कहानियों को पढ़ते समय मुझे लगा कि मैं एक नए ही समाज से मिल रही हूँ। ‘कसक’ की कहानियों को उन्होंने मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत दस्तावेज़ बताते हुए कहा कि माता- पिता के संघर्ष, युवा मन और नई पीढ़ी के द्वन्द्व को, संघर्ष को रोचक अभिव्यक्ति देने के साथ साथ लेखक ने इस ओर भी जागरूकता फैलाने का सुंदर प्रयास किया है कि जो दूसरे की क्षमता को आंकने में अक्षम है, अंधता वहाँ भी है।

कान्ता राय ने चंचल पाहुजा के ‘अशोकांजलि’ गीत संग्रह के शीर्षक को बहुत मधुर बताते हुए कहा कि इसके गीतों को पढ़कर गुनगुनाने का मन करता है और उन्होंने कुछ गीतों का मधुर गायन कर मंच को भावविभोर कर दिया।  आयोजन में मुख्य अतिथि के पद पर शोभायमान वरिष्ठ कथाकार और साहित्यकार बलराम अग्रवाल ने दोनों रचनाकारों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना व्यक्त की। बलराम अग्रवाल ने दोनों पुस्तकों की व्यापक समीक्षा करते हुए कहा कि कहानी संग्रह ‘कसक’ की हर कहानी समाज के वास्तविक यथार्थ धरातल से उठाई गई कहानियाँ हैं, जिसे लेखक ने अपनी सुंदर कल्पना से कहानी में ढाला है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि लेखन में रूढ़ियों को तोड़ा जाएगा।

‘अशोकांजलि’ के गीतों पर अपना रूख रखते हुए उन्होंने कहा कि यदि ये विषय के अनुसार क्रमबद्ध होते और छंद पर थोड़ा परिश्रम और किया जाता तो यह गीत संकलन और भी निखर उठता। अध्यक्ष के पद पर आरूढ़ वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार सुभाष अखिल ने भी ‘कसक’ के रचयिता एस. जी. एस. सिसोदिया और ‘अशोकांजलि’ की लेखिका चंचल पाहुजा को बधाई और शुभकामनाएँ समर्पित करते हुए अपने लेखन क्षेत्र के अनुभव साझा किए, जो मंचासीन सभी साहित्यिक कलमकारों के लेखन में सहायक सिद्ध होंगे।

तत्पश्चात लेखक द्वय ने अपनी दोनों पुस्तकों के विषय में सारगर्भित संक्षिप्त परिचय दिया और मंचासीन सभी अतिथियों की सकारात्मक समीक्षा और उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया। दूसरा चरण श्रीमती एवं खुशहाल सिंह पयाल स्मृति सम्मान समारोह के विजेताओं की घोषणा का था। सिसोदिया ने सबको बताया कि 2017 से वे यह पुरस्कार अपने सास और श्वसुर की पुण्य स्मृति में विभिन्न विधाओं पर लिखी पुस्तकों पर प्रणेता साहित्य संस्थान के मंच से देते आ रहे हैं।

विगत वर्षों के विजेताओं की सूचना देते हुए उन्होंने वर्ष 2020 के पुरस्कारों की घोषणा करते हुए कहा कि तृतीय पुरस्कार वरिष्ठ साहित्यकार और शिक्षिका श्रीमती सरिता गुप्ता को उनके कहानी संग्रह ‘एहसास के पल’ के लिए दिया गया है। जिसके अन्तर्गत 1100 रुपए और सम्मान पत्र से उन्हें सम्मानित किया गया। द्वितीय पुरस्कार अति सम्मानित और वरिष्ठ साहित्यकार तथा ‘श्रीराम कालेज ऑफ़ कॉमर्स’ के एसोसिएट प्रोफेसर डा.रवि शर्मा ‘मधुप’ को ‘चिंतन के साहित्यिक रंग’ (साहित्यिक शोधपरक निबंध संग्रह) के लिए दिया गया, जिसके अन्तर्गत उन्हें 1500 रुपए और सम्मान पत्र दिया गया। प्रथम पुरस्कार रक्तदान के महान और उदात्त उद्देश्य के प्रति समर्पित वरिष्ठ साहित्यकार मधुकांत को उनके उपन्यास ‘गूगल बाय’ को दिया गया, जिसके अन्तर्गत उन्हें 2100रुपए और सम्मान पत्र दिया गया।

सभी पुरस्कृत विजेता साहित्यकारों ने प्रणेता साहित्य संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पुरस्कार से कोरोना काल में उनका उत्साह वर्धन हुआ है और उनके लेखन को नव ऊर्जा भी प्राप्त हुई है।

मंचासीन साहित्यकारों में स्वीटी सिंघल सखी ने सह संचालिका के रूप मे अपना सहयोग दिया तथा तरुणा पुण्डीर, शिवानी कक्कड़, अन्नू गौड़, हेमलता कौशिक, अंजू कोहली, मीनू थरेजा, पुनीत थरेजा, अमिताभ मिश्रा, सुभाष सिंह, प्रोफेसर श्यामलाल, कविता शर्मा, अर्चना पाण्डेय, सुषमा भटनागर, निर्मल राय ने भी अपनी बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

अंत में प्रणेता साहित्य संस्थान की उपाध्यक्ष शकुंतला मित्तल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, कार्यकारिणी सदस्यों, समीक्षकों और मंच पर उपस्थित प्रत्येक साहित्यकार का धन्यवाद किया। पुस्तक विमोचन के ऐतिहासिक और विशिष्ट आयोजन ने प्रणेता साहित्य संस्थान के इस ऑनलाइन कार्यक्रम को चिर स्मरणीय बना दिया। जिसके अन्तर्गत उन्हें 2100रुपए और सम्मान पत्र दिया गया। सभी पुरस्कृत विजेता साहित्यकारों ने प्रणेता साहित्य संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पुरस्कार से कोरोना काल में उनका उत्साह वर्धन हुआ है और उनके लेखन को नव ऊर्जा भी प्राप्त हुई है।

मंचासीन साहित्यकारों में स्वीटी सिंघल सखी  ने सह संचालिका के रूप मे अपना सहयोग दिया तथा तरुणा पुण्डीर,शिवानी कक्कड़,अन्नू गौड़,हेमलता कौशिक,अंजू कोहली,मीनू थरेजा, पुनीत थरेजा, अमिताभ मिश्रा,सुभाष सिंह,प्रोफेसर श्यामलाल,कविता शर्मा,अर्चना पाण्डेय,सुषमा भटनागर,निर्मल राॅय जीने भी अपनी बधाई और शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। अंत में प्रणेता साहित्य संस्थान की उपाध्यक्ष शकुंतला मित्तल ने सभी अतिथियों,प्रतिभागियों,कार्यकारिणी सदस्यों,समीक्षकों और मंच पर उपस्थित प्रत्येक साहित्यकार का धन्यवाद किया। पुस्तक विमोचन के ऐतिहासिक और विशिष्ट आयोजन ने प्रणेता साहित्य संस्थान के इस आनलाइन कार्यक्रम को चिर स्मरणीय बना दिया।

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