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मेरा विद्यालय …

 

आज मैंने प्रवेश किया
विद्यालय था वह नया
दिन नया, साथी नए
मेरा भी अनुभव नया।
नए माहौल में महसूस की
थोड़ी हिचकिचाहट
नया क्लासरूम, नए बच्चे,
कुछ उद्दंड, कुछ शरारती
और मन के सच्चे।
कुछ ने किया वेलकम,
कुछ परेशान थे,
चेहरा मेरा देखकर
बहुत से हैरान थे।
सोच रही थी, नए माहौल में
कैसे निभा पाऊँगी,
वे भी सोच रहे थे
मैं उन्हें कैसे बुलाऊँगी!
पर जो सोचा था,
विपरीत उसके हुआ
बच्चों से मेरा
अच्छा साक्षात्कार हुआ।
वे खुश थे, नए मैडम आए हैं
मैं खुश थी, वे मुझे भाए हैं
उन्होंने पहले मुझे देखा
मेरा पर्स देखा
मेरे कपड़ों पर गौर किया
ऊपर से नीचे तक देखा,
निहारा एकटक
शायद पसंद भी किया।
चेहरों पर उनके मुस्कुराहट थी
मन में सोच बड़ी प्यारी थी
वे मुझे ताकते रहे
मैं मुस्कुराती रही
सोच रही थी खड़ी-खड़ी
प्रभु है यहीं,
प्रभु है यहीं।

 

©डॉ. प्रज्ञा शारदा, चंडीगढ़                

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