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सांसद सरोज ने हाईकोर्ट में क्रॉस एग्जामिनेशन से किया मना, लगा 6 हजार का जुर्माना…

बिलासपुर। हाईकोर्ट में सांसद के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्यसभा सांसद सरोज पाण्डेय के वकील ने समय मांग लिया। इस पर कोर्ट ने गवाहों के खर्चे की भरपाई के लिए 6 हजार रूपए का जुर्माना लगाया। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।

 

दरअसल, साल 2018 में राज्यसभा के लिए चुनी गईं सांसद सरोज पांडेय के निर्वाचन को कांग्रेस के प्रत्याशी लेखराम साहू ने चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती दी है। नियमों के मुताबिक चुनाव याचिकाओं का निपटारा 6 माह में करना होता है, लेकिन कोरोना काल के चलते डेढ़ साल तक गवाही शुरू नहीं हो पाई थी। मामले में शुक्रवार को सुनवाई होनी थी। इसमें गवाहों का क्रॉस एग्जामिन यानी विपक्ष के वकील को सवाल-जवाब करने थे।

 

गवाहों को हाजिर होने के लिए 28 सितंबर को ही शपथ पत्र प्रस्तुत किया जा चुका था। इसके लिए लेखराम साहू सहित दोनों गवाह पहुंच गए थे। लेखराम साहू के अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और हिमांशु शर्मा ने जस्टिस सैम पी कोशी की बेंच को तीनों गवाहों के क्रॉस एग्जामिन के लिए सुबह से ही उपस्थित होने की जानकारी दी। बेंच ने इसके लिए सरोज पांडेय के अधिवक्ता अविनाश चंद्र साहू को कहा कि पर उन्होंने असमर्थता जताई, साथ ही और समय मांगा।

 

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि मंगलवार को ही शपथपत्र की प्रतिलिपि उपलब्ध करा दी गई थी। गवाह भी धमतरी और दुर्ग से आ चुके हैं । इस पर कोर्ट ने कहा कि 3 दिन से अधिक का समय शपथ पत्र मिलने के बाद हो चुका है। अगर आज प्रति-परीक्षण नहीं करना था तो पहले से याचिकाकर्ता को सूचना दी जानी चाहिए थी। उनका आना व्यर्थ हो गया। अतः उन्हें खर्चे की भरपाई होनी जरूरी है। इसके लिए प्रत्येक के लिए 2-2 हजार रुपए जमा कराएं।

 

लेखराम साहू की ओर से दायर चुनाव याचिका में सरोज पांडेय के शपथ पत्र में बैंक अकाउंट को छुपाने और निवास स्थान के बारे में गलत पते की जानकारी देने जैसे कई आरोप लगाए गए हैं। साथ ही उनके निर्वाचन को इस आधार पर भी चुनौती दी गई है कि प्रस्तावक समर्थकों में बहुत से विधायक लाभ के पद पर होने के कारण मतदान करने के पात्र नहीं थे। उनका नामांकन पत्र पूर्व में ही रद्द किया जाना चाहिए था। अब 29 अक्टूबर को सभी गवाहों का प्रति-परीक्षण किया जाएगा।

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