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एमपी उपचुनाव : खंडवा से ज्ञानेश्वर पाटिल होंगे बीजेपी के सांसद प्रत्याशी…

भोपाल। मध्य प्रदेश में एक लोकसभा और 3 विधानसभा सीटों पर होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी ने भी गुरुवार को अपने उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर दिए हैं। बीजेपी ने खंडवा लोकसभा सीट से ज्ञानेश्वर पाटिल का नाम तय किया गया है। रैगांव विधानसभा सीट से प्रतिमा बागरी, पृथ्वीपुर विधानसभा सीट से शिशुपाल यादव और जोबट विधानसभा सीट से सुलोचना रावत का नाम तय किया गया है।

 

मध्यप्रदेश में होने वाले उपचुनावों में खंडवा लोकसभा सीट पर सबकी निगाहें हैं। दोनों प्रमुख सियासी दलों ने अपनी रणनीति बना ली है। बीजेपी ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ज्ञानेश्वर पाटिल को टिकट देकर ओबीसी कार्ड खेला है। इसे यहां की 26% ओबीसी आबादी को साधने की रणनीति माना जा रहा है, जबकि इसके बिल्कुल उलट कांग्रेस ने सामान्य वर्ग के राजनारायण सिंह पुरनी पर दांव लगाया है। यहां सामान्य वर्ग की आबादी 20 फीसदी है। भाजपा ने खंडवा लोकसभा सीट पर 25 साल बाद ओबीसी चेहरा दिया है। इसकी एक वजह यह भी है कि इस संसदीय क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 19 लाख 68 हजार है। इसमें से ओबीसी के 5 लाख 16 हजार हैं, जबकि सामान्य वर्ग के मतदाता 4 लाख से कम हैं। जातीय समीकरण के गणित से देखें तो यहां एससी-एसटी वर्ग के वोटर सबसे ज्यादा 7 लाख 68 हजार हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में आठ में से 3 विधानसभा क्षेत्रों में आदिवासी वोटर निर्णायक भूमिका में हैं।

 

खंडवा में 8 बार भाजपा और 7 बार कांग्रेस का रहा कब्जा

1962 से अब तक हुए 15 चुनाव में इस सीट पर 8 बार BJP तथा BLD और 7 बार कांग्रेस का कब्जा रहा है। नंदकुमार सिंह चौहान और अरुण यादव के बीच तीन बार मुकाबला हुआ। इनमें दो बार अरुण यादव को हार का सामना करना पड़ा है। दिवंगत सांसद चौहान 6 बार खंडवा लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। नंदकुमार सिंह चौहान और अरुण यादव के बीच तीन बार मुकाबला हुआ। इनमें दो बार अरुण यादव को हार का सामना करना पड़ा है। दिवंगत सांसद चौहान 6 बार खंडवा लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। कोरोना संक्रमित होने के बाद इलाज के दौरान सांसद चौहान की मौत हो जाने से इस सीट पर उप चुनाव हो रहा है।

 

किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगी भाजपा के लिए आदिवासी वोट की वापसी

आदिवासी वोट की अहमियत का अहसास 2018 के विधानसभा चुनाव में कर चुकी भाजपा के लिए उपचुनाव में भी चुनौती बनी हुई है। खंडवा लोकसभा सीट सहित 3 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव में आदिवासी वर्ग की निर्णायक भूमिका तय है। खंडवा और जोबट सीट पर इस वर्ग को साधना बीजेपी के लिए अग्नि परीक्षा साबित होगी। दरअसल, खंडवा लोकसभा सीट की 8 में से 3 आदिवासी और एक अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों पर मतदान का आंकड़ा देखें तो स्पष्ट होता है कि यहां सीधा मुकाबला हमेशा से बीजेपी और कांग्रेस के बीच रहा है। विधानसभा-लोकसभा में किसे भेजना है, इसकी चाबी आदिवासी वर्ग के हाथ में ही रही है, लेकिन मुश्किल यह है कि फिलहाल दोनों ही दलों के पास आदिवासी चेहरों का टोटा है।

 

कांग्रेस को फॉर्मूला- 2018 पर भरोसा

कांग्रेस 2018 के विधानसभा चुनाव में मिली जीत को उपचुनाव में कैश कराने की तैयारी में है। 2018 के चुनाव में कांग्रेस को खंडवा लोकसभा क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटों पर BJP के मुकाबले अच्छी बढ़त हासिल हुई थी। फिर भी कांग्रेस को 2021 के लोकसभा सीट के उपचुनाव में आदिवासी वोटरों से खासी उम्मीद है।

 

बीजेपी ने चार में से दो सीटों पर बाहरियों पर भरोसा जताया

भाजपा ने 4 सीटों में से दो विधानसभा सीटों पर बाहर से आए लोगों को टिकट दिया है। सुलोचना रावत तीन दिन पहले ही बीजेपी में शामिल हुई थीं। उन्हें पार्टी ने टिकट दे दिया है। सुलोचना जोबट की कांग्रेस से तीन बार विधायक रह चुकी हैं। वहीं, पृथ्वीपुर से पार्टी ने शिशुपाल सिंह यादव को टिकट दिया है। वह समाजवादी पार्टी से आए हैं। एमपी से पार्टी नेतृत्व ने कई दावेदारों के नाम भेजे थे। आधी रात को इस पर दिल्ली में मुहर लगी और गुरुवार की सुबह सूची जारी कर दी गई।   

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