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एमपी उपचुनाव दिलचस्प बना : रैगांव में बेटे-बहू सहित 5 प्रत्याशी एक ही परिवार से…

भोपाल। उपचुनाव में उम्मीदवारी के लिए नाम-निर्देशन पत्र जमा करने का शुक्रवार आखिरी दिन था। रैगांव विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 36 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है। रैगांव के रण में नामांकन जमा करने के आखिरी समय तक जो तस्वीर फिलहाल सामने आई है, उसमें भाजपा का मुकाबला कांग्रेस से कहीं ज्यादा बागरी परिवार से ही होता नजर आ रहा है। यहां भरे गए पर्चों के अनुसार 5 ऐसे प्रत्याशी चुनाव मैदान में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ने को तैयार हैं, जिनके पारिवारिक रिश्ते भी हैं।

 

ऐसे हैं इन 5 उम्मीदवारों के पारिवारिक रिश्ते

  • जुगल बागरी के बड़े बेटे पुष्पराज ने निर्दलीय पर्चा भरा।
  • छोटी बहू वंदना ने भी निर्दलीय पर्चा भरा।
  • जुगल के रिश्ते में भतीजे धीरू ने सपा से पर्चा दाखिल किया।
  • प्रतिमा बागरी को भाजपा से टिकट मिला है। यह जुगल किशोर की छोटी बहू की भतीजी हैं।
  • रानी बागरी ने भी पर्चा भरा है। जुगल किशोर इनके रिश्ते में ससुर लगते थे।

खंडवा: पूर्व सांसद स्व. नंदू भैया के बेटे हर्षवर्धनसिंह चौहान की दूरी ने भाजपा की मुश्किल बढ़ाई

वहीं खंडवा लोकसभा सीट के लिए 17 लोगों ने नामांकन दाखिल कर दावेदारी की है। खंडवा में कांग्रेस से टिकट पर राजनारायण सिंह ने 3 और भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल ने 2 नामांकन पत्र भरे हैं। यहां पूर्व सांसद स्व. नंदू भैया के बेटे हर्षवर्धनसिंह चौहान की दूरी ने भाजपा की मुश्किल बढ़ा रखी है। हालांकि, पार्टी के नेता उनसे संपर्क कर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस दमोह मॉडल पर फोकस करते दिख रही है और अचानक हुए बिजली संकट की आशंका को बड़ा मुद्दा बनाने में जुट गई है। खंडवा में निर्दलीय में कोई बड़ा नाम नहीं होने से पार्टियों को राहत है।

 

खंडवा में अकेली महिला कैंडिडेट मथुराबाई

खंडवा लोकसभा सीट पर 17 दावेदारों की सूची में महिला कैंडिडेट में मथुराबाई (41) का नाम है। मथुराबाई खंडवा तहसील अंतर्गत रोहणी गांव की निवासी हैं। 10वीं तक पढ़ी मथुराबाई आशा कार्यकर्ता हैं। पति भगवानसिंह राजपूत रोहिणी ग्राम पंचायत में सरपंच (प्रधान) हैं।

 

जोबट विधानसभा: 9 मैदान में, कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाईं

जोबट में 9 उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। जोबट में कांग्रेस की दिवंगत विधायक कलावती भूरिया के भतीजे दीपक भूरिया ने पार्टी से बगावत कर ताल ठोंक दी। उन्होंने कांग्रेस ने टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने महेश पटेल को उतार दिया। दीपक भूरिया ने अपना प्रचार-प्रसार भी शुरू कर दिया है। यहां दीपक कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं। दूसरी ओर इस सीट पर भाजपा की राह भी आसान नहीं है। यहां प्रत्याशी घोषणा के चार दिन पूर्व ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं पूर्व विधायक सुलोचना रावत को प्रत्याशी बनाने से अंदरखाने स्थानीय नेता काफी नाराज हैं और पार्टी को भीतरघात का डर सता रहा है, हालांकि शीर्ष नेतृत्व ने स्थानीय नेताओं की नाराजगी को दूर करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।

 

पृथ्वीपुर में भी बगावत के सुर बढ़ते जा रहे हैं

पृथ्वीपुर विधानसभा सीट पर 11 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है। यहां भी बगावत के सुर बढ़ते जा रहे हैं। भाजपा ने पृथ्वीपुर विधानसभा उपचुनाव में डॉ. शिशुपाल यादव को उम्मीदवार बनाया है। डॉ. शिशुपाल यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी हैं और इसी सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। डॉ. शिशुपाल को टिकट मिलते ही बाहरी बताकर बीजेपी के अंदर भितरघात की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। यहां ब्राह्मण समाज के कई दावेदार गणेशीलाल नायक, पूर्व विधायक सुनील नायक की पत्नी अनीता नायक और अनिल पांडे थे, जिन्हें दरकिनार कर पार्टी ने शिशुपाल को उम्मीदवार बनाया। वहीं, समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ रहे मोतीलाल कुशवाहा पहले बीजेपी की सक्रिय कार्यकर्ता थे, लेकिन अब समाजवादी पार्टी से पृथ्वीपुर विधानसभा के प्रत्याशी हैं। इस तरह पृथ्वीपुर में बीजेपी ने अपना वोट बैंक बनाए रखने के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दी है।

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