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आरक्षण के लिए आंदोलन, हाईवे से इंटरनेट तक ठप; जानें इसके बारे में सबकुछ …

नई दिल्ली। आरक्षण के लिए आंदोलन जोर पकड़ रहा है और सरकार असमंजस में है।  सैनी माली कुशवाहा मौर्य शाक्य समाज का आरक्षण की मांग को लेकर 3 दिनों से आंदोलन जारी है। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह आंदोलन कर रहे नेताओं से वार्ता करने के लिए बैठे हुए हैं । नेताओं को वार्ता के लिए न्योता भी भेजा गया है मगर नेता वार्ता करने नहीं आ रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने हाईवे जाम कर दिया है, जिसकी वजह से पुलिस को रूट डायवर्ट तक करना पड़ा है। इसके अलावा भरतपुर में कई जगहों पर इंटरनेट सेवा भी बंद है। देश में आरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जिसे लेकर जब कभी आंदोलन होता है तो सभी का ध्यान इसपर जाता है। हम आपको बताते हैं कि आखिर इस आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा है? क्या मांगें हैं उनकी और अभी आंदोलन को लेकर वहां क्या हालात हैं।

सबसे पहले बता दें कि भरतपुर में नेशनल हाईवे 21 पर चक्का जाम और आंदोलन को देखते हुए संभागीय आयुक्त सांवरमल वर्मा ने जिले की चार तहसील नदबई, वैर, भुसावर और उच्चैन में इंटरनेट सेवा को बंद कर रखा है। पहले इंटरनेट सेवा 13 जून की सुबह 11:00 बजे से 14 जून तक बंद की गई थी। लेकिन अब इसे बढ़ाकर 15 जून की सुबह 11:00 बजे तक कर दिया गया है। इंटरनेट सेवा बंद करने का उद्देश्य है कि आंदोलन के वीडियो या फोटो वायरल नहीं किए जाएं जिससे आंदोलन अन्य जगहों तक नहीं पहुंच सके।

इस आंदोलन को एक नेतृत्व विहीन आंदोलन भी कहा जा रहा है। दरअसल इसकी वजह यह है कि इस आंदोलन को लेकर कोई भी प्रमुख नेता सामने नहीं आ रहा है। हालांकि, आंदोलनकारियों ने 31 सदस्यों की कमेटी बनाकर वार्ता के लिए सरकार के प्रतिनिधियों को भेज दी है। मगर कमेटी के सदस्य वार्ता करने नहीं पहुंचे। जबकि सरकार की कमेटी में शामिल कैबिनेट मंत्री विश्वेन्द्र सिंह और संभागीय आयुक्त सांवरमल वर्मा इंतजार करते रहे।

विश्वेंद्र सिंह ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आंदोलन से आमजन परेशान हो रहा है। 45 डिग्री तापमान के बीच बुजुर्ग और महिलाएं बैठी हुई हैं यदि कोई अप्रिय घटना हुई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। हम आमंत्रण दे रहे हैं फिर भी वार्ता करने नहीं आ रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘मैं विनम्र अपील करता हूं कि आंदोलन कर रहे नेता वार्ता के लिए सामने आए जिससे उनकी मांग ऊपर पहुंचाई जा सके। मुझे तो फिलहाल ऐसा लगता है कि इस आंदोलन का कोई नेता भी नहीं है। आम जनता को ज्यादा परेशान नहीं किया जाए। इसलिए हमारी अपील है की सभी समाजों के नेता वार्ता के लिए आगे आये जिससे कोई समाधान निकाला जा सके।’

भरतपुर संभाग में सैनी, माली, काछी, मौर्य, कुशवाहा और शाक्य ऐसी अनेक जातियां हैं जिनका विकास अन्य जातियों के बराबर नहीं हो पाया है। जातियों में आईएएस, आईपीएस, अधिकारी भी कम ही बन पाए हैं। इन जातियों का ज्यादातर धंधा फल और सब्जियां उगाना है जिनके आधार पर ये अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं।

इन जातियों का मानना है कि उन्हें आरक्षण की बेहद आवश्यकता है। जिस तरह से गुर्जर समाज या मीणा समाज या अनुसूचित जाति को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, वैसा लाभ इन्हें भी मिलना चाहिए। भरतपुर संभाग में देखा जाए तो इन जातियों की स्थिति पिछड़ी हुई है। यह शिक्षा से भी वंचित ही रहे हैं और इनके पास कृषि भूमि भी बेहद कम है।

आंदोलन कर रहे नेता मुरारीलाल और बदन सिंह ने बताया कि हमारी जातियां हालांकि अन्य पिछड़ा वर्ग में आरक्षण ले रही हैं लेकिन हमें इस तरह का आरक्षण नहीं चाहिए। हमारी जातियों को 12% आरक्षण सबसे अलग चाहिए। जिस तरह से अनुसूचित जाति व जनजाति और गुर्जर समुदाय को विशेष आरक्षण प्राप्त है उसी तरह से हमारी जातियों को भी अलग से 12% आरक्षण दिया जाए ।

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