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43 साल से लंबित पड़े सरयू नहर परियोजना का मोदी आज करेंगे उद्घाटन…

लखनऊ। शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी उत्तरप्रदेश के बलरामपुर में 43 साल से लंबित पड़े सरयू नहर परियोजना का उदघाटन करेंगे। यह परियोजना पूर्वांचल के किसानों के लिए मददगार साबित होगी। जिन्हें सिचाईं कार्यों के लिए पानी की कमी से जूझना पड़ता था। इस परियोजना से पूर्वांचल इलाके में बहने वाली नदियां आपस में जुड़ेगी।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत साल 1978 में की गई थी। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को कुल 9800 करोड़ की लागत से पूरा किया गया है। इस परियोजना से पूर्वांचल के 14 लाख हेक्टेयर से अधिक खेतों की सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे पूर्वी उत्तरप्रदेश के 6200 से अधिक गांवों के लगभग 29 लाख किसानों को फायदा पहुंचेगा।

इस परियोजना से पूर्वी उत्तरप्रदेश के नौ जिलों बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुर और महाराजगंज सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे। यह परियोजना 6623 किलोमीटर लंबी है। इस परियोजना में पांच नदियों घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा और रोहिणी को भी आपस में जोड़ा गया है। साल 2015 में पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री कृषि सिचाईं योजना प्रारंभ की थी। इसके बाद ही इस परियोजना में तेज गति से काम शुरू हुआ।

राज्य की भाजपा सरकार ने इस परियोजना के अधर में लटके रहने को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना भी साधा। पिछले दिनों बलरामपुर दौरे पर गए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस परियोजना को साल 1978 में शुरू किया गया लेकिन 52 प्रतिशत काम 2017 में राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद पूरा हुआ। इस परियोजना के लिए करीब 50 प्रतिशत राशि का प्रावधान भी चार सालों में ही किया गया।

पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने भी ट्वीट कर इस परियोजना में देरी के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा कि आपको जानकर हैरानी होगी कि सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना पर काम 1978 में शुरू हुआ था लेकिन दशकों तक यह परियोजना पूरी नहीं हुई। खर्चा भी बढ़ गया और लोगों की परेशानी भी बढ़ गई। चार दशक से अधूरा प्रोजेक्ट चार साल में पूरा हुआ है।

पीएम मोदी ने यह भी लिखा कि पिछले चार वर्षों के दौरान सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना पर तेजी से हुआ काम लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को पूरा करने को लेकर हमारी सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप है। जल संसाधनों के उपयोग से हमारे किसानों को लाभ पहुंचेगा और यह ‘ईज ऑफ लिविंग’ को भी आगे बढ़ाएगा।

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